बंगालियों से भेदभाव के खिलाफ ममता बनर्जी का पैदल मार्च, कोलकाता की सड़कों पर उमड़ी भीड़
कोलकाता | 16 जुलाई 2025:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कोलकाता में भारी बारिश के बीच एक विशाल पैदल मार्च का नेतृत्व किया। यह विरोध प्रदर्शन भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी नागरिकों के साथ कथित भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ था। मुख्यमंत्री का आरोप है कि अन्य राज्यों में रहने वाले बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ करार देकर निशाना बनाया जा रहा है, जो संविधान के खिलाफ है।
📢 ममता बनर्जी का तीखा हमला
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा,
“Bengali is not Bangladeshi. यह अपमान है हमारी भाषा और संस्कृति का।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा बंगालियों को अवैध घुसपैठिया कहकर बिजली, पानी और मूलभूत सुविधाएं रोक रही है।
🛑 मार्च की शुरुआत और भागीदारी
मार्च की शुरुआत कॉलेज स्क्वायर से सुबह 11 बजे हुई और यह डोरिना क्रॉसिंग तक गया।
बारिश के बावजूद हजारों तृणमूल कार्यकर्ता, मंत्री और सांसद इसमें शामिल हुए।
मार्च में अभिषेक बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और वरिष्ठ TMC नेताओं ने भाग लिया।
🗳️ राजनीतिक रणनीति और संदेश
इस आंदोलन को बंगाल में भाषा और पहचान के सम्मान की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। ममता बनर्जी आगामी 2026 के चुनावों में इस मुद्दे को जनभावना से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। यह कदम राज्य की राजनीति में भावनात्मक कार्ड के रूप में भी देखा जा रहा है।
🌍 बड़ी तस्वीर
हाल के हफ्तों में राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से खबरें आईं कि बंगाली प्रवासी मजदूरों को हिरासत में लिया गया, कुछ को ‘बांग्लादेशी’ कहकर बदसलूकी की गई। इन्हीं घटनाओं ने TMC को राष्ट्रव्यापी बंगाली समुदाय के लिए आवाज़ उठाने का आधार दिया है।
📌 निष्कर्ष
ममता बनर्जी का यह मार्च केवल विरोध नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सांस्कृतिक घोषणा भी है — कि बंगालियों की पहचान, भाषा और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

