किरंदुल, छत्तीसगढ़:
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। किरंदुल के धर्मपुर कैंप (वार्ड क्रमांक 4) की 11 गरीब महिलाएं पिछले दो वर्षों से इस योजना के लाभ से वंचित हैं। इन महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन फॉर्म आंगनबाड़ी केंद्र में जमा किया था, लेकिन वह फॉर्म अब रिकॉर्ड से गायब हो गया है
दो साल से इंतजार, लेकिन नहीं मिला लाभ
महिलाओं ने बताया कि उन्होंने करीब दो वर्ष पहले आंगनबाड़ी केंद्र में आवेदन प्रक्रिया पूरी की थी। सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया। जब उन्होंने इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की, तो न तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और न ही नगर पालिका प्रशासन के पास कोई संतोषजनक जवाब मिला।
यह स्थिति उन महिलाओं के लिए और भी चिंताजनक है, जो पहले से ही गरीबी रेखा (BPL) के अंतर्गत आती हैं और जिनके लिए यह योजना आर्थिक सहारा बन सकती थी।
क्या है महतारी वंदन योजना?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई महतारी वंदन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सहायता प्रदान करना है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि महिलाओं के दैनिक खर्चों और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
लेकिन धर्मपुर कैंप की इन महिलाओं के लिए यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है।
फॉर्म गुम होने का गंभीर आरोप
महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनका आवेदन फॉर्म आंगनबाड़ी केंद्र से ही गुम हो गया, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, क्योंकि सरकारी योजनाओं में आवेदन और रिकॉर्ड की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।
महिलाओं की प्रमुख मांगें
महिलाओं ने जन शिकायत विभाग को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई हैं और निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- गुम हुए आवेदन फॉर्म की तत्काल जांच की जाए
- उनके आवेदन को दोबारा स्वीकार किया जाए
- आवश्यक होने पर विशेष शिविर आयोजित कर प्रक्रिया पूरी की जाए
- सभी पात्र महिलाओं को जल्द से जल्द योजना का लाभ दिया जाए
प्रभावित महिलाओं के नाम
इस मामले में शिकायत करने वाली महिलाओं में सुलता साहू, रेणुका साहू, जानकी, लक्ष्मी साहू, शारदा अनिला, मोनिका साहू, गणेश्वरी ठाकुर, शोभा, कुंती साहू, चंद्रिका ठाकुर और शांति ठाकुर शामिल हैं।
महिलाओं की भावनात्मक अपील
महिलाओं ने अपने पत्र में लिखा:
“हम सभी गरीबी रेखा के अंतर्गत आते हैं। पिछले दो वर्षों से हम इस योजना के लाभ से वंचित हैं। कृपया हमारी समस्या का समाधान किया जाए और हमें हमारा अधिकार दिलाया जाए।”
उनका कहना है कि यदि उन्हें यह सहायता समय पर मिलती, तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो सकता था।
प्रशासन के लिए चुनौती
यह मामला सिर्फ 11 महिलाओं का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। यदि आवेदन प्रक्रिया में ही ऐसी लापरवाही होती है, तो जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
निष्कर्ष
किरंदुल का यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और इन महिलाओं को उनका हक दिलाता है।
सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचे।

