SIR विवाद: CM ममता बनर्जी का तेज़ और निर्णायक जवाब – “जब तक मैं जिंदा हूं, किसी का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी”
कोलकाता, 28 अगस्त 2025:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया है। मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा की रैली में ममता ने जोर देते हुए कहा, “जब तक मैं जिंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार छीनने की अनुमति नहीं दूंगी।”
SIR प्रक्रिया पर कड़ा विरोध
ममता ने SIR को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के समान बताते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए बंगाली मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे उनकी वोटर लिस्ट से कटौती हो सकती है। उन्होंने इसे ‘भाषाई आतंक’ बताया और बंगाली समुदाय को सतर्क रहने की सलाह दी।
भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर बंगाली भाषा और संस्कृति को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने भाषा अधिकारों और मताधिकार के प्रति जागरूक रहें। ममता ने कहा कि हर व्यक्ति को यह खुद सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज है या नहीं।
चुनाव आयोग और प्रशासन पर निशाना
ममता ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए कि वह प्रशासनिक अधिकारियों को दबाव में लेकर लोकतंत्र की भावना को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
SIR विवाद ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गर्माहट बढ़ा दी है। ममता बनर्जी के कड़े रुख ने भाजपा सरकार को सीधे निशाने पर रखा है। आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा और भी ज्यादा संवेदनशील बन गया है, जो राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।
निष्कर्ष
ममता बनर्जी का यह बयान न केवल वोटर लिस्ट की समीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि लोकतंत्र, भाषा, और नागरिक अधिकारों के संरक्षण की भी गहन चुनौती पेश करता है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक विवाद और तीव्र होने की पूरी संभावना है।

