उत्तराखंड: धराली गांव में बादल फटने से तबाही, 200 से अधिक लोग फंसे, एक युवक का शव बरामद
उत्तरकाशी, उत्तराखंड – 6 अगस्त 2025:
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में रविवार देर रात आई भीषण आपदा ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। बादल फटने (Cloudburst) और भारी बारिश की वजह से अचानक आई बाढ़ और मलबे ने गांव को बुरी तरह से घेर लिया। इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 50 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। गांव में करीब 200 लोग फंसे हुए हैं जिनमें स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री शामिल हैं।
🚨 आपदा का मंजर
रात के अंधेरे में आई इस आपदा ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। पानी और मलबे का तेज बहाव कई घरों और दुकानों को बहा ले गया। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, एक युवक का शव बरामद किया गया है जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति मलबे से संघर्ष करते हुए खुद को बाहर निकालता नजर आया।
🛡️ बचाव और राहत कार्य
भारतीय सेना की Ibex ब्रिगेड, ITBP, SDRF, और स्थानीय प्रशासन तेजी से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। सेना के जवानों ने हर्षिल कैंप से निकल कर मात्र 10 मिनट में धराली पहुंच कर अब तक करीब 20 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
बचाव कार्य में Mi-17 हेलीकॉप्टर, HAL Dhruv, चिनूक, और ड्रोन समेत आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है। खराब मौसम, लगातार बारिश और सड़कें टूट जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधाएं आ रही हैं।
🗣️ प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राहत कार्य “युद्धस्तर” पर चल रहे हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर दुख व्यक्त किया और कहा कि केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी।
⚠️ आगे की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और यात्रा से बचने की अपील की है।
📌 निष्कर्ष
धराली गांव की यह त्रासदी एक बार फिर यह याद दिलाती है कि जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक वर्षा हिमालयी क्षेत्रों के लिए कितनी घातक हो सकती है। प्रशासन, सेना और राहत दलों के प्रयासों के बावजूद मौसम और भौगोलिक चुनौतियाँ रेस्क्यू में बाधा बन रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा।

