उत्तराखंड में प्रोटोकॉल विवाद: लोकसभा अध्यक्ष के दौरे में सम्मान न देने पर डीएम से स्पष्टीकरण तलब
देहरादून से एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दौरे के दौरान निर्धारित सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। बताया जा रहा है कि देहरादून दौरे के दौरान लोकसभा अध्यक्ष को वह औपचारिक सम्मान नहीं दिया गया जो संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को मिलना चाहिए था। इस घटना को लेकर उत्तराखंड शासन ने देहरादून के जिलाधिकारी (DM) से स्पष्टीकरण तलब किया है।
लोकसभा अध्यक्ष का दौरा कोई सामान्य घटना नहीं होती – यह एक संवैधानिक गरिमा और राज्य के प्रशासनिक तंत्र की तत्परता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार, न तो निर्धारित स्तर का स्वागत किया गया, और न ही प्रशासन ने उस संवैधानिक पद की मर्यादा के अनुरूप व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और सम्मान प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं थी।
मुख्य सचिव कार्यालय ने डीएम को पत्र जारी कर इस चूक पर तत्काल लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक पदों के प्रति ऐसी उदासीनता को गंभीरता से लिया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह एक सामान्य भूल थी या फिर प्रोटोकॉल को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष भी इस घटना को मुद्दा बनाकर सरकार और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करने में जुट गया है।
यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के प्रति एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। यदि ऐसे उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी प्रोटोकॉल और गरिमा से वंचित किया जा रहा है, तो इससे नीचे के स्तर पर शासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठते हैं। अब देखना यह है कि डीएम का जवाब क्या होता है और सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है।

