उत्तराखंड सरकार का सख्त फैसला: बिना पंजीकरण चल रहे नशा मुक्ति केंद्र होंगे बंद, होगी कड़ी कार्रवाई
देहरादून, 12 जुलाई 2025 – उत्तराखंड सरकार ने राज्य में चल रहे बिना पंजीकरण या नियमों के विरुद्ध संचालित नशा मुक्ति केंद्रों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अब ऐसे सभी केंद्रों को तत्काल बंद किया जाएगा, और उनके संचालकों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
📌 क्या है आदेश का मुख्य उद्देश्य?
राज्य के स्वास्थ्य सचिव आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में नशा मुक्ति केंद्रों की सघन निगरानी और सत्यापन किया जाएगा। यह निर्णय राज्य में बढ़ते अवैध, अपंजीकृत और असुरक्षित केंद्रों की संख्या को देखते हुए लिया गया है।
“बिना पंजीकरण चल रहे या मापदंडों का उल्लंघन कर रहे केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
— आर. राजेश कुमार, स्वास्थ्य सचिव, उत्तराखंड
🧾 लागू होंगे ये महत्वपूर्ण कदम:
हर जिले में विशेष निरीक्षण टीम गठित की जा रही है।
बिना रजिस्ट्रेशन या मान्यता वाले केंद्र तत्काल बंद किए जाएंगे।
संबंधित संचालकों पर जुर्माना और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
राज्य में जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा ताकि आम नागरिक भी ऐसे केंद्रों की पहचान कर सकें।
🧠 क्यों ज़रूरी है यह कदम?
राज्य में कई अवैध नशा मुक्ति केंद्र अनियंत्रित रूप से चल रहे हैं, जो न केवल रोगियों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, बल्कि नशीली दवाओं के गलत इस्तेमाल और अमानवीय व्यवहार की घटनाओं को भी जन्म दे रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के अनुसार, हर केंद्र को पंजीकृत होना अनिवार्य है और न्यूनतम सुविधाएं देना अनिवार्य है।
🔍 इससे क्या बदलेगा?
बेहतर निगरानी से अवैध और अमानवीय केंद्रों पर रोक लगेगी।
प्रामाणिक और सुरक्षित उपचार उपलब्ध होगा।
नशा मुक्ति सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
जनता को मिलेगा भरोसा कि उनके प्रियजन सही हाथों में हैं।
📢 सरकार की अपील
उत्तराखंड सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र में किसी अवैध या संदिग्ध नशा मुक्ति केंद्र के बारे में जानकारी हो, तो वे तुरंत संबंधित जिला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें।

