गाजियाबाद। नंदग्राम के उत्तरांचल नगर में बुधवार की रात शायद ही किसी की आंख में नींद आई हो। हर किसी की निगाह उस पल का इंतजार कर रही थी, कि जब मणिपुर के उखरूल जिले में उग्रवादी हमले में बलिदान हुए असम राइफल्स के हवलदार चंद्र मोहन सिंह रावत का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचेगा। देर रात सैन्य वाहन जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर लेकर पहुंचा, पूरा इलाका गम में डूब गया। ‘भारत माता की जय’ और ‘बलिदानी चंद्र मोहन सिंह अमर रहें’ के नारों के बीच लोगों ने नम आंखों से अंतिम श्रद्धांजलि दी। परिवार के लिए यह पीड़ा इसलिए भी और गहरी है क्योंकि तीन जून को ही बलिदान के पिता का निधन हुआ था।
गलियां पूरी रात शोक में डूबी रहीं
पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही पत्नी मंजू देवी पति को अंतिम बार देखकर बेसुध हो गईं। बेटियां रितिका और यशिका पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलखती रहीं, जबकि बेटा राहुल नम आंखों से पिता को अंतिम सलामी देता रहा। परिवार के दर्द को देखकर वहां मौजूद रिश्तेदार, पड़ोसी और अन्य लोग भी भावुक हो उठे। देर रात तक अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ घर के बाहर उमड़ी रही। उत्तरांचल नगर की गलियां पूरी रात शोक में डूबी रहीं।
चंद्र मोहन सिंह रावत 2008 से गाजियाबाद में थे रह रहे
सामान्य दिनों में चहल-पहल से रहने वाला इलाका बुधवार रात पूरी तरह शांत था। लोग घरों से निकलकर बलिदानी के आवास के बाहर खड़े रहे। हर चेहरे पर बलिदानी को खोने का दुख और उनके साहस पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के डांडातोली क्षेत्र के कुकलियाल गांव निवासी चंद्र मोहन सिंह रावत वर्ष 2008 से गाजियाबाद में रह रहे थे।
वर्ष 2018 से उनका परिवार उत्तरांचल नगर स्थित अपने आवास में रह रहा था। भतीजे आशीष रावत ने बताया कि बलिदानी का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे हरनंदी स्थित मोक्ष स्थल पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। देर रात तक प्रशासनिक अफसरों और स्थानीय लोगों का बलिदानी के आवास पर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया
परिवार के लिए यह पीड़ा इसलिए भी और गहरी है क्योंकि तीन जून को ही बलिदानी के पिता का निधन हुआ था। पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वह छुट्टी लेकर घर आए थे। अवकाश पूरा होने के बाद तीन जुलाई को गाजियाबाद से ड्यूटी के लिए रवाना हुए और पांच जुलाई को यूनिट में कार्यभार संभाला। इसके महज दो दिन बाद मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
परिवार ने खो दिए दो सहारे
बलिदानी हवलदार चंद्र मोहन सिंह रावत के परिवार पर 35 दिन के भीतर दो सहारों को खो दिया है। तीन जून को उनके पिता का निधन हुआ था और अब परिवार ने अपना पति और पिता खो दिया। परिवार में पत्नी मंजू देवी गृहिणी हैं। 24 वर्षीय बेटा राहुल नंदग्राम में स्टेशनरी की दुकान चलाता है, जबकि 19 वर्षीय रितिका और 15 वर्षीय यशिका पढ़ाई कर रही हैं। पिता के पार्थिव शरीर के सामने तीनों बच्चों और पत्नी का विलाप वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।

