यूपी: ‘ये कांवड़िए नहीं गुंडे हैं’ – स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर बवाल, हिंदू संगठनों ने घर के बाहर किया प्रदर्शन
लखनऊ, 24 जुलाई 2025:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक टिप्पणी को लेकर भूचाल आ गया है। राज्य के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांवड़ यात्रा पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “ये कांवड़िए नहीं, सत्ता संरक्षण में पले गुंडे और माफिया हैं।” इस बयान के बाद हिंदूवादी संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है।
📢 विवादास्पद बयान में क्या कहा गया?
प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“कांवड़ यात्रा के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व सत्ता संरक्षण में सड़कों पर आराजकता फैला रहे हैं। यह धार्मिक आस्था नहीं, एक साजिश है। ये कांवड़िए नहीं, गुंडे हैं।”
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
⚠️ हिंदू संगठनों का हंगामा
विश्व हिंदू रक्षा परिषद समेत कई संगठनों ने मौर्य के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया।
विरोध में प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ स्थित मौर्य के घर के बाहर धरना दिया और जलाभिषेक कर “शुद्धिकरण” की चेतावनी दी।
“भोलेनाथ के भक्तों को गुंडा कहने वाले खुद मानसिक रूप से बीमार हैं”, ऐसा बयान हिंदू महासभा के प्रतिनिधियों ने दिया।
🛡️ पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई
संभावित खतरे को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने मौर्य के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी है।
इलाके में अतिरिक्त फोर्स और बैरिकेडिंग की गई है ताकि स्थिति नियंत्रित रहे।
प्रदर्शनकारियों पर नज़र रखने के लिए पुलिस वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर रही है।
🗣️ मौर्य का बचाव
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा:
“मैंने किसी सच्चे श्रद्धालु के खिलाफ कुछ नहीं कहा। मेरा निशाना उन लोगों पर है जो धार्मिक यात्राओं की आड़ में गुंडागर्दी करते हैं।”
उन्होंने कहा कि अगर कोई इससे आहत है तो वह उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है।
🔍 राजनीतिक हलचल
इस बयान से यूपी में सियासी गर्मी तेज हो गई है।
भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताया और मौर्य से माफी की मांग की है।
विपक्षी दलों ने बयान से दूरी बना ली है, जबकि कुछ नेताओं ने इसे “व्यक्तिगत मत” कहकर अलग किया।
📌 निष्कर्ष
एक ओर जहां कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक को लेकर प्रशासनिक चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, वहीं ऐसे बयानों से धार्मिक भावनाएं और राजनीति दोनों भड़क रही हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि धर्म और राजनीति का मेल भारतीय राजनीति में कितना संवेदनशील विषय है।

