उत्तराखंड कैबिनेट बैठक: धामी सरकार ने लिए तीन बड़े फैसले, कुंभ मेले से लेकर डिजिटल स्टांप तक सुधार
देहरादून | 23 जुलाई 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में राज्यहित से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। ये फैसले कुंभ मेले की तैयारियों, शिक्षा विभाग की नियुक्तियों और ई-गवर्नेंस से संबंधित हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य इन निर्णयों के ज़रिए प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जनसुविधा को सुदृढ़ बनाना है।
📌 मुख्य फैसले एक नज़र में
| क्रम | प्रस्ताव | उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1 | कुंभ मेले के लिए 82 पदों का सृजन | आयोजन व्यवस्था मज़बूत करना |
| 2 | शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य चयन नियमों में संशोधन | चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना |
| 3 | ई-स्टांप प्रणाली को सरल एवं प्रभावी बनाना | डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाना |
🛕 1. कुंभ मेले के लिए 82 नई नियुक्तियों को मंज़ूरी
हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले 2025–26 को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए धामी सरकार ने 82 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी है। इनमें प्रशासनिक, तकनीकी और फील्ड स्टाफ की नियुक्तियां की जाएंगी।
यह फैसला समयबद्ध तरीके से इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्थाओं को गति देगा।
🎓 2. शिक्षा विभाग में नियुक्ति नियमों में बदलाव
सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य पद की चयन प्रक्रिया को और अधिक मापदंड-आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए नियमावली में संशोधन को हरी झंडी दे दी है।
इस संशोधन का मकसद योग्य उम्मीदवारों को वरीयता देना और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खत्म करना है।
💻 3. ई-स्टांपिंग प्रणाली में तकनीकी सुधार
प्रदेश में ई-स्टांप सेवा को और अधिक सरल व सुलभ बनाने के लिए तकनीकी बदलावों को मंजूरी दी गई है। इससे लोगों को स्टांप दस्तावेज़ ऑनलाइन तरीके से बिना दलालों के आसानी से मिल सकेंगे।
यह फैसला आम नागरिकों को समय, श्रम और धन की बचत कराएगा।
🗣️ मुख्यमंत्री धामी का वक्तव्य
बैठक के बाद सीएम धामी ने कहा:
“हमारा प्रयास है कि हर निर्णय नागरिकों की सुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल उत्तराखंड की दिशा में एक ठोस कदम हो। कुंभ मेला, शिक्षा और ई-गवर्नेंस तीनों ही हमारी प्राथमिकताओं में हैं।”
📝 निष्कर्ष
धामी सरकार के ये तीन फैसले राज्य की प्रशासनिक क्षमता, शिक्षा प्रणाली और डिजिटल सेवाओं में नए आयाम जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक पहल हैं। इससे आगामी कुंभ मेला बेहतर ढंग से आयोजित किया जा सकेगा, वहीं शिक्षा और राजस्व सेवाओं में आम जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा।

