उत्तर प्रदेश के वकीलों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही अस्पतालों में उनके कैशलेस इलाज का इंतजाम हो सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखपुर से उनके लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था बनाने को तैयार है। इस संबंध में जल्द ही एक प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि अधिवक्ताओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। सीएम मंगलवार को गोरखपुर बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह में बतौर अतिथि शामिल हुए। इस दौरान सीएम ने पदाधिकारियों का परिचय प्राप्त किया और उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
सीएम ने कहा कि अधिवक्ता केवल मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के विधिक सलाहकार, संविधान के सारथी और नागरिकों के विश्वास के प्रतीक हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं से देश और समाज के खिलाफ रची जाने वाली साजिशों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और फर्जी अकाउंट के जरिए समाज को जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे प्रयासों का विधिक और सामाजिक स्तर पर मजबूती से प्रतिकार करना होगा। सीएम योगी ने कहा कि न्याय तभी सार्थक है, जब वह गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सभी के लिए सुलभ हो। इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू कराने में भी अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया है और इसके लिए 500 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। अब तक करीब चार हजार अधिवक्ताओं को 200 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा आर्थिक सहायता की आयु सीमा 70 वर्ष तक बढ़ाई गई है तथा नए न्यायालय भवनों और अधिवक्ताओं के चैंबरों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है।
प्रदेश अब दंगों और अराजकता नहीं, बल्कि विकास, निवेश और रक्षा उत्पादन के लिए पहचाना जा रहा है। भारत आज वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना चुका है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय, मंत्री अनुज अस्थाना, सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, अधिवक्ता पीके दुबे, विपिन शुक्ला, अखंड, अभय मिश्रा, अवनीश सिंह, गौरव शुक्ला, सच्चिदानंद त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
जिला जज बोले- नए कानूनों से बढ़ी पारदर्शिता
समारोह में जिजा जज राजकुमार सिंह ने कहा कि नए आपराधिक कानून नागरिकों को अधिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग, गिरफ्तारी का लिखित कारण देने की अनिवार्यता और प्रत्येक मामले में फोरेंसिक जांच जैसी व्यवस्थाओं से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है तथा निर्दोष लोगों के गलत तरीके से फंसने की आशंका घटी है। उन्होंने बताया कि एक अगस्त 2025 को जनपद में 2,83,120 वाद लंबित थे, जिनमें से 27 जुलाई 2026 तक 1,81,372 वादों का निस्तारण किया जा चुका है।
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के समन्वित प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर चारों राष्ट्रीय लोक अदालतों में प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। जिले में 70 न्यायालय स्वीकृत हैं, लेकिन जजों की कमी के कारण वर्तमान में केवल 43 न्यायालय ही संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद सीमित संसाधनों और कोर्ट रूम की कमी के बीच न्यायाधीशों ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक मामलों का निस्तारण कर उल्लेखनीय कार्य किया है।

