दंतेवाड़ा में जिला स्तरीय सत्संग का सफल आयोजन, पूर्ण परमात्मा के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आयोजित दंतेवाड़ा सत्संग 2026 का कार्यक्रम रविवार, 5 अप्रैल को भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। बस्तर संभाग के अंतर्गत चितालंका स्थित नामदान केंद्र में आयोजित इस जिला स्तरीय सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
यह आयोजन संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ, जहां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति के महत्व से अवगत कराया गया।
पूर्ण परमात्मा के स्वरूप पर विशेष प्रकाश
सत्संग के दौरान प्रवचनों में “पूर्ण परमात्मा” के वास्तविक स्वरूप को विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि वेदों और पवित्र ग्रंथों के अनुसार पूर्ण परमात्मा का जन्म सामान्य मनुष्यों की तरह माता के गर्भ से नहीं होता, बल्कि वे स्वयं प्रकट होते हैं।
प्रवचन में यह भी बताया गया कि उनका शरीर पंचतत्व से निर्मित नहीं होता और न ही वह किसी माता-पिता के संयोग से उत्पन्न होता है। यह अवधारणा श्रोताओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और विचारणीय रही।
धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों से समझाया गया ज्ञान
सत्संग में श्रीमद्भागवत महापुराण और भगवद्गीता के प्रमाणों के आधार पर बताया गया कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव जन्म-मृत्यु के अधीन हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूर्ण परमात्मा उनसे भिन्न और सर्वोच्च हैं।
विशेष रूप से गीता के अध्याय 15 के श्लोक 17 और 4 का उल्लेख करते हुए बताया गया कि “उत्तम पुरुष” कोई अन्य परम तत्व है, जिसकी भक्ति करने से साधक मोक्ष प्राप्त कर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो सकता है।
पूर्ण परमात्मा की विशेषताएं बताई गईं
प्रवचन में बताया गया कि पूर्ण परमात्मा सर्वशक्तिमान हैं और वे जीवों के प्रारब्ध को भी बदलने की क्षमता रखते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि वे अपनी दिव्य लीलाओं के पश्चात सहशरीर ही वापस चले जाते हैं।
श्रद्धालुओं को दिया गया आध्यात्मिक संदेश
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर सच्चे ज्ञान को अपनाने का संदेश दिया गया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण अत्यंत शांत, भक्तिमय और अनुशासित रहा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ।
निष्कर्ष: आस्था और ज्ञान का संगम
दंतेवाड़ा सत्संग 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के मूल्यों को समझने का अवसर भी प्रदान किया। इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

