jansamwad tvjansamwad tvjansamwad tv
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • महाराष्ट्र
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • गुजरात
    • पश्चिम बंगाल
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
Reading: हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर
Share
Font ResizerAa
jansamwad tvjansamwad tv
Font ResizerAa
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • महाराष्ट्र
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • गुजरात
    • पश्चिम बंगाल
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर
उत्तराखंडराज्य

हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर

Tripty Srivastava
Last updated: January 8, 2026 8:43 am
Tripty Srivastava
Share
SHARE

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि) गुरमीत सिंह द्वारा आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में आयोजित संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू-आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि मध्य सेक्टर को परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा है, किंतु वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से भारत-चीन सीमा के मध्य सेक्टर में, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सैन्य, नागरिक प्रशासन और समाज के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

Contents
About The AuthorTripty Srivastava

राज्यपाल ने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियाँ अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे-जोन गतिविधियों, द्वि-उपयोगी आधारभूत संरचना, और सीमा क्षेत्रों में निरंतर दबाव जैसे कारकों से भी आकार ले रही हैं। ऐसे परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों की दीर्घकालिक सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों से नहीं, बल्कि नागरिक प्रशासन, स्थानीय समुदायों और प्रौद्योगिकी के साथ प्रभावी समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सीमाई सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रम सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को भी सुदृढ़ करते हैं।

राज्यपाल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाएँ परिचालन तत्परता के अनिवार्य घटक हैं। उन्होंने चारधाम परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है, बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करती है।

उन्होंने आधुनिक प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ड्रोन, उन्नत निगरानी प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म परिस्थितिजन्य जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया में सहायक हैं, किंतु तकनीक नेतृत्व, विवेक और संस्थागत मजबूती का विकल्प नहीं हो सकती।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन का सीधा संबंध परिचालन क्षमता से है। पर्यावरणीय क्षरण से न केवल जीवन और आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि लॉजिस्टिक्स, संचार और आपदा प्रबंधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

अपने संबोधन के समापन पर राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी सीमाओं की वास्तविक शक्ति शांत तैयारी, संस्थागत समन्वय और सामाजिक विश्वास में निहित है। जब सैन्य बल, नागरिक प्रशासन और समाज एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब हिमालयी सीमाएँ अधिक सुदृढ़, स्थिर और सुरक्षित बनती हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य नागरिक से जुड़े विषय पर सेमिनार का होना अति महत्वपूर्ण है। कहा कि सेमिनार से निकले सुझाव हमारी सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने में सहायक एवं हिमालयी क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित जनसंख्या जैसी चुनौतियों को देखते हुए सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में सीमाओं के आस-पास निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जो वास्तव में देश के आँख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा करना सेना के साथ साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सीमांत गांव माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ही माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र के बॉर्डर की चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण और तकनीक के अपग्रेडेशन के साथ ही अवसंरचनात्मक विकास के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित संबंधित उपस्थित थे।

highlights

Toggle
  • About The Author
    • Tripty Srivastava

About The Author

Tripty Srivastava

See author's posts

Subscribe to Our Newsletter
Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
[mc4wp_form]
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article यूपी में आज से मुफ्त राशन वितरण कार्यक्रम की होगी शुरुआत, 23 जिलों में फ्री राशन के साथ मिलेगा ज्वार और बाजरा
Next Article स्व. हरबंस कपूर की 80वीं जयंती पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

देहरादून उत्तरायणी कौतिक महोत्सव–2026
उत्तराखंडराज्य

देहरादून उत्तरायणी कौतिक महोत्सव–2026: मुख्यमंत्री धामी मुख्य अतिथि के रूप में होंगे शामिल

देहरादून। सेवा संकल्प फाउंडेशन के तत्वावधान में दिनांक 05 फरवरी से 08 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले “देहरादून उत्तरायणी…

1 Min Read
इंडियाछत्तीसगढ़ताजा खबरराज्य

डीएवी पब्लिक स्कूल किरंदुल में CISF द्वारा अग्निशमन सेवा सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

किरंदुल में CISF का फायर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम, छात्रों और स्टाफ को दी महत्वपूर्ण जानकारी किरंदुल, 18 अप्रैल 2026 —…

4 Min Read
उपमुख्यमंत्री
राज्यहिमाचल प्रदेश

हिमाचल राजनीति में नई गरमाहट: उपमुख्यमंत्री ने पुराने भूमि घोटाले पर सवाल उठाए

गगरेट (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की ओर से ऊना जिले के हरोली में भूमि खरीद घोटाले पर इंटरनेट…

4 Min Read
77वें गणतंत्र दिवस
उत्तर प्रदेशराज्य

देशभक्ति की एकजुटता: 77वें गणतंत्र दिवस का भव्य समारोह

दिनांक 26.01.2026 को फुटबॉल ग्राउंड में देश का 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। मुख्‍य अतिथि श्री रवीन्‍द्र नारायण, अधिशासी…

1 Min Read
jansamwad tv

यदि आपको “https://jansamwadtv.com/” पर छपी किसी सामग्री या वीडियो कंटेंट में सम्पादकीय आचार संहिता की चूक को लेकर कोई शिकायत है तो आप Contact@jansamwadtv.com E-mail कर अपनी शिकायत हमारे Grievance Officer को भेज सकते हैं।

विज्ञापन के लिए संपर्क करें:

contact@jansamwadtv.com

  • Privacy Policy
  • About us
  • Disclamer
  • Contact Us
Reading: हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर
Share

© Jansamwadtv. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?

Forget Password