साहिबाबाद (गाजियाबाद)। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना को दूषित करने वालीं आवासीय क्षेत्रों में संचालित करीब 1500 अवैध फैक्ट्रियां चिह्नित की हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अगले तीन माह तक लगातार अभियान चलाकर जिला प्रशासन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ इन फैक्ट्रियों को सील करेगा। फिर से फैक्ट्रियों का संचालन न हो इसके लिए विशेष टीमें निगरानी करेंगी।
ट्रांस हिंडन के ट्रोनिका सिटी, गगन विहार, भोपुरा, डिफेंस कालोनी, पंचशील कालोनी, राजीव कालोनी, कृष्णा विहार कुटी, टीला मोड, आर्य नगर, रूप नगर, बेहटा, नाईपुरा, धूपखेड़ी आदि आवासीय क्षेत्रों के घरों में अवैध फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं।
यह कार्य लोनी के कई गांवों में खेती वाले क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इन अवैध फैक्ट्रियों का पानी साहिबाबाद नाले के माध्यम से शाहदरा नाले में गिरता है। शाहदरा नाले से ये दूषित पानी यमुना में जाकर गिरता है।
इनमें से ज्यादातर फैक्ट्रियां रंगाई की हैं, जिनमें विभिन्न रसायनों का उपयोग होता है। इससे पहले करीब 400 फैक्ट्री चिह्नित की गई थीं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि करीब 350 फैक्ट्रियों को सील किया जा चुका है।
अब चिह्नित की गईं फैक्ट्रियों पर भी गाज गिरेगी। इन फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन काटने और सील करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही फिर से संचालित न हों इसके लिए यूपीपीसीबी की टीम फैक्ट्रियों की निगरानी करेगी। इसके लिए समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाएगा।
इन क्षेत्रों से गुजरता हुआ साहिबाबाद नाला
साहिबाबाद नाला लोनी से शुरू होकर विभिन्न क्षेत्रों से होता हुआ टीला मोड पहुंचता है। टीला मोड से पसौंडा, शालीमार गार्डन, शहीद नगर, रामप्रस्थ ग्रीन, बृज विहार, साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-चार, वैशाली और गाजीपुर से होकर गुजरता है। जो शाहदरा नाले में जाकर गिरता है। घरेलू सीवेज के साथ ही कारखानों का औद्योगिक अपशिष्ट भी इसी नाले के माध्यम से यमुना में गिरता है।
फिर से कनेक्शन जोड़ने की जिला प्रशासन से की शिकायत
एक तरफ फैक्ट्रियों के कनेक्शन काटे जाते हैं, दूसरी ओर विद्युत निगम के कर्मी फिर से जोड़ देते हैं। इसकी शिकायतें लगातार आ रही हैं। इस पर यूपीपीसीबी ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा है।
यूपीपीसीबी ने फिर से बिजली कनेक्शन न जोड़ने की मांग की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने प्रशासन से कहा कि इससे कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
साहिबाबाद नाले में बीओडी की मात्रा छह गुना पाई गई
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की अप्रैल की जांच में साहिबाबाद ड्रेन सबसे ज्यादा प्रदूषित मिला। यहां बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा 180 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि मानक केवल 30 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
केमिकल आक्सीजन डिमांड (सीओडी) 392 मिलीग्राम प्रति लीटर और पानी में तैरते अघुलनशील ठोस कण यानी टोटल सस्पेंडेड सालिड (टीएसएस) 284 मिलीग्राम प्रति लीटर पाए गए, जो तय सीमा से बहुत अधिक हैं।
करीब डेढ़ हजार फैक्ट्रियों का दूषित पानी नाले के माध्यम से यमुना जाकर गिरता है। इन सभी फैक्ट्रियों के कनेक्शन काटते हुए सील किया जाएगा। फिर से संचालन न हो इसके लिए निगरानी भी का जाएगी।
–
अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी

