सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के साथ माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय प्रभावी बना हुआ है, जिससे कार्यवाही को अंतिमता मिली है और नोएडा-107 स्थित ग्रेट वैल्यू रियल्टी के प्रोजेक्ट एकानम को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) प्रदान किए जाने से जुड़े सभी मुद्दों का निपटारा हो गया है।
इससे पहले, माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रिट याचिका को गुण-दोष से रहित मानते हुए खारिज कर दिया था, जिससे नोएडा प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत अतिरिक्त FAR और राज्य सरकार के पुनरीक्षण आदेश बरकरार रहे।
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026: ग्रेट वैल्यू रियल्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने नोएडा-107 स्थित ग्रेट वैल्यू रियल्टी के अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट एकानम को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) प्रदान किए जाने से संबंधित माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद दर्ज किया कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के संबंधित निर्णय एवं आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए “इच्छुक नहीं” है और तदनुसार SLP को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के साथ माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय प्रभावी बना हुआ है, जिससे कार्यवाही को अंतिमता मिली है और ग्रेट वैल्यू एकानम को अतिरिक्त FAR प्रदान किए जाने से जुड़े सभी मामलों का निपटारा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रतिवादी ग्रेट वैल्यू रियल्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता महेश अग्रवाल, कार्तिकेय दुबे तथा कानूनी टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मुकुल रोहतगी ने कहा,
“माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और परिणामस्वरूप शरणम AOA द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया। इस आदेश के साथ न्यायालय के समक्ष लंबित चुनौती को अंतिमता मिली है और यह उच्च न्यायालय की कार्यवाही से उभरने वाली कानूनी स्थिति को और स्पष्ट करता है।”
ग्रेट वैल्यू रियल्टी के निदेशक श्री पायस अग्रवाल ने कहा,
“हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश और इससे सभी हितधारकों के लिए आई स्पष्टता का स्वागत करते हैं। इस निष्कर्ष से हमें इस मामले को पीछे छोड़कर भविष्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है। ग्रेट वैल्यू रियल्टी जिम्मेदार विकास, हितधारकों के साथ पारदर्शी संवाद और ऐसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से दीर्घकालिक मूल्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उन समुदायों के विकास में सार्थक योगदान देते हैं, जिनकी वे सेवा करते हैं।”
यह मामला ग्रेट वैल्यू एकानम को अतिरिक्त FAR प्रदान किए जाने संबंधी नोएडा प्राधिकरण की स्वीकृति को एसोसिएशन द्वारा दी गई चुनौती से संबंधित था। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में संबंधित आदेशों को बरकरार रखा था। न्यायालय ने, अन्य पहलुओं के साथ, यह भी उल्लेख किया था कि नोएडा प्राधिकरण ने सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की थी और 978 वैध सहमतियां पाई थीं, जो इस विषय पर गृहस्वामियों की बहुमत सहमति को दर्शाती थीं। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया था कि प्राधिकरण ने आवेदन और आपत्तियां आमंत्रित करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया था।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एकानम के लिए स्वीकृत अतिरिक्त FAR से संबंधित नियामकीय और कानूनी ढांचे को स्पष्टता प्रदान करता है तथा इस मामले में सक्षम प्राधिकरणों द्वारा पारित आदेशों को मजबूती प्रदान करता है। यह आदेश ग्रेट वैल्यू रियल्टी की उस नींव को भी मजबूत करता है, जिसके आधार पर कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले विशिष्ट प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो विकसित करने और नोएडा के उभरते रियल एस्टेट परिदृश्य में सार्थक योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

