नई दिल्ली। जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र या वित्तीय सीमा को दो करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का समर्थन करने के दिल्ली हाई काेर्ट की फुल काेर्ट के विचार के विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने 14 जुलाई को काम से दूर रहने का निर्णय किया है। सोमवार को डीएचसीबीए ने अपनी कार्यकारी समिति में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया है।
डीएचसीबीए ने कहा कि प्रस्तावित बढ़ोतरी से न्याय प्रणाली के साथ-साथ बड़ी संख्या में इसके सदस्यों की प्रैक्टिस, आजीविका और पेशेवर हितों पर काफी असर पड़ेगा, क्योंकि इससे हाई कोर्ट में मामलों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत कम हो जाएगी।
प्रस्ताव में कहा गया कि फुल कोर्ट के निर्णय का डीएचसीबीए विरोध करता है और 14 जुलाई को अधिवक्ताओं ने काम से दूर रहने का निर्णय किया है। जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र को दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करना दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है।
11 जुलाई को समन्वय समिति ने अपने सदस्यों को धन्यवाद पत्र जारी किया क्योंकि हाई कोर्ट ने आर्थिक अधिकार क्षेत्र को 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के विचार का समर्थन किया था। हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने फ़ुल कोर्ट के सामने आर्थिक अधिकार क्षेत्र रिपोर्ट पेश करने पर रोक लगाने की मांग वाली डीएचसीबीए की याचिका 10 जुलाई को ठुकरा दी थी।

