नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
ग्रेटर नोएडा। गंभीर बीमारी की आशंका, मन में कैंसर का डर और इलाज को लेकर अनिश्चितता के बीच यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1 में उपचार कराने वाले 72 वर्षीय मनोहर सिंह अब अपनी सेहत में सुधार से संतुष्ट हैं। लिवर में 10 से 12 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर होने और लिवर सिरोसिस, डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जूझ रहे मनोहर सिंह की जटिल सर्जरी के बाद अस्पताल में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान मरीज को बैठाकर मीडिया के सामने उनके स्वास्थ्य और उपचार के अनुभव साझा किए गए। मरीज ने डॉक्टरों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के चिकित्सकों ने उन्हें समझाया, उनका डर दूर किया और बेहतर इलाज दिया।

पहले बीमारी को लेकर था डर, अब खुद बताया अपना अनुभव
प्रेस वार्ता के दौरान मनोहर सिंह ने बताया कि बीमारी के बारे में पता चलने के बाद वह काफी डरे हुए थे। बाहर जांच कराने के दौरान उन्हें कैंसर होने की बात बताई गई थी, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई। इसके बाद उनकी बहन उन्हें उपचार के लिए यथार्थ हॉस्पिटल लेकर आईं।
मरीज के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें ऑपरेशन और बीमारी को लेकर काफी डर लग रहा था, लेकिन यहां के डॉक्टरों ने उन्हें विस्तार से समझाया और इलाज के प्रति भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उनका अच्छा उपचार हुआ है और अब वह खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। मरीज ने चिकित्सकों और अस्पताल की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके व्यवहार और उपचार की प्रशंसा की।

10–12 सेंटीमीटर के ट्यूमर की जटिल सर्जरी बनी बड़ी चुनौती
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, आगरा के धनौली निवासी मनोहर सिंह पिछले करीब नौ महीने से पेट में दर्द की समस्या से परेशान थे। जांच के दौरान उनके लिवर के दाहिने हिस्से में लगभग 10–12 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर सामने आया। इसके साथ उन्हें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लिवर सिरोसिस की समस्या भी थी।
मरीज की जटिल चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए सर्जरी से पहले उनके स्वास्थ्य, हृदय एवं फेफड़ों की कार्यक्षमता और लिवर के शेष हिस्से की स्थिति का आकलन किया गया। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मिनिमली इनवेसिव तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया।
करीब छह से सात घंटे तक चले ऑपरेशन में लेप्रोस्कोपिक राइट हेपेटेक्टॉमी के माध्यम से लिवर के दाहिने हिस्से से ट्यूमर निकाला गया। इस दौरान लगभग 200 मिलीलीटर रक्तस्राव हुआ। अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के दौरान कोई बड़ी सर्जिकल जटिलता सामने नहीं आई। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में निगरानी में रखा गया और स्वास्थ्य में सुधार होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाला जटिल मामला
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ निदेशक एवं रोबोटिक व लेप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी, जीआई ऑन्कोलॉजी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लिवर सिरोसिस जैसी समस्याओं के साथ बड़े ट्यूमर की सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में ट्यूमर को निकालने के साथ लिवर की शेष कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपचार की योजना तैयार की गई और विशेषज्ञ टीम ने सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही।
मरीज का भरोसा बना प्रेस वार्ता का प्रमुख संदेश
प्रेस वार्ता में मनोहर सिंह का अपना अनुभव चर्चा का प्रमुख विषय रहा। उन्होंने जिस तरह बीमारी को लेकर अपने शुरुआती डर, डॉक्टरों द्वारा समझाए जाने और उपचार के बाद बेहतर महसूस करने की बात साझा की, उससे मरीज और चिकित्सक के बीच भरोसे का महत्व सामने आया।
गंभीर बीमारी की आशंका के समय मरीज और उसके परिजनों को सही चिकित्सकीय जानकारी, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार की प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी होता है। मनोहर सिंह का मामला भी इसी बात को रेखांकित करता है कि जटिल सर्जरी में चिकित्सकीय विशेषज्ञता के साथ मरीज का विश्वास और उपचार के दौरान उचित देखभाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

