ओडिशा से सामने आई एक हैरान कर देने वाली घटना ने पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां छात्रों को परीक्षा केंद्र के कमरों की जगह हवाई अड्डे के रनवे पर बैठाकर परीक्षा दिलाई गई। इस असामान्य और चिंताजनक व्यवस्था ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या छात्रों की गरिमा और सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित परीक्षा केंद्र पर छात्रों की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक थी, जबकि कक्षाओं और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था बेहद सीमित थी। समय रहते कोई वैकल्पिक इंतजाम न होने के कारण प्रशासन ने अस्थायी समाधान के रूप में खुले रनवे को ही परीक्षा स्थल बना दिया। सैकड़ों छात्र जमीन पर बैठकर, बिना डेस्क और कुर्सी के, परीक्षा देने को मजबूर हुए।
तेज धूप, खुले वातावरण और असहज परिस्थितियों के बीच परीक्षा दे रहे छात्रों का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि छात्र घुटनों पर कॉपी रखकर लिख रहे हैं, जबकि पास ही विमान और एयरपोर्ट की अन्य संरचनाएं दिखाई दे रही हैं। यह दृश्य शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की ओर इशारा करता है।
छात्रों का कहना है कि इस तरह के माहौल में एकाग्र होकर परीक्षा देना बेहद मुश्किल था। कुछ छात्रों ने बताया कि जमीन गर्म होने के कारण लंबे समय तक बैठना तकलीफदेह रहा। वहीं, सुरक्षा को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों में डर बना रहा, क्योंकि परीक्षा स्थल एक सक्रिय हवाई अड्डे के पास था।
अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े संगठनों ने इस व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मौके पर छात्रों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। खुले रनवे पर परीक्षा कराना न केवल छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे “शिक्षा व्यवस्था की विफलता” करार दिया, जबकि कुछ ने प्रशासन पर छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते बेहतर योजना बनाई जाती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
प्रशासन की ओर से सफाई
मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की संख्या अचानक बढ़ने और सीमित संसाधनों के कारण यह निर्णय लेना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि व्यवस्था आदर्श नहीं थी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक राज्य या एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में परीक्षा आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि बढ़ती आबादी और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या को देखते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना समय की मांग है।
फिलहाल, ओडिशा में रनवे पर परीक्षा कराने का यह मामला प्रशासन, शिक्षा विभाग और सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। यह घटना याद दिलाती है कि शिक्षा केवल परीक्षा कराने का नाम नहीं, बल्कि छात्रों को सम्मानजनक, सुरक्षित और अनुकूल माहौल देना भी उतना ही जरूरी है।

