बचेली (दंतेवाड़ा)। संयुक्त खदान मजदूर संघ (SKMS – एटक), बचेली शाखा ने एनएमडीसी (NMDC) में कार्यरत कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों और क्षेत्रवासियों की विभिन्न समस्याओं व लंबित मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ हुंकार भरी है। संघ की ओर से निदेशक (कर्मिक), एनएमडीसी लिमिटेड (मुख्यालय, हैदराबाद) के नाम एक ज्ञापन एनएमडीसी बचेली के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख को सौंपा गया।
संघ ने स्पष्ट किया कि एनएमडीसी की ऐतिहासिक उपलब्धियों और ‘महारत्न’ बनने की दिशा में मजदूरों का अटूट समर्पण व कठिन परिश्रम शामिल है। इसलिए कर्मचारियों के अधिकारों, स्वास्थ्य, कल्याण और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी मांगे जो लंबे समय से लंबित है , उन्हें भी पूर्ण करना अति आवश्यक है।

ज्ञापन में शामिल प्रमुख 11 मांगें इस प्रकार है , मैनपावर की कमी से श्रमिकों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। RS-01 व RS-02 की लंबित रिक्त अधिसूचनाओं को शीघ्र पूरा कर स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता दी जाए। जुलाई 2024 से लंबित ठेका श्रमिकों के वेतन समझौते को जल्द लागू कर आर्थिक राहत प्रदान की जाए। माइंडिंग, सर्विस और प्लांट विभागों में छोटे-छोटे कार्यों को निजी हाथों में सौंपने की प्रथा तत्काल बंद की जाए।

NEET व JEE की कोचिंग बचेली कॉम्प्लेक्स में पूर्व की तरह प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सुविधा पुनः शुरू हो। बचेली क्षेत्र में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने हेतु DPS (दिल्ली पब्लिक स्कूल) जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो। आयुर्वेदिक अस्पतालों का एम्पेनलमेंट कर्मचारियों व परिजनों के बेहतर इलाज के लिए HIIMS, KOTTAKAL, आर्य वैद्यशाला, पतंजलि, IIM, IISC आदि को नामांकित किया जाए। IIT, NEET, NIT व IIIT में चयनित कर्मचारियों के बच्चों की संपूर्ण शिक्षा का खर्च एनएमडीसी प्रबंधन वहन करे। टाउनशिप में बारिश के दिनों में लाल पानी की समस्या और गर्मियों में पानी की किल्लत को दूर करने हेतु स्थायी व्यवस्था की जाए। एनएमडीसी अपोलो सेंट्रल हॉस्पिटल के कर्मचारियों का लंबित वेतन समझौता शीघ्र पूरा किया जाए। पिछले 3-4 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे अपोलो अस्पताल के कर्मचारियों को जल्द नियमित किया जाए। सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की नियुक्ति परियोजना चिकित्सालय में कार्डियोलॉजिस्ट व नेफ्रोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की जाए।
SKMS बचेली ने प्रबंधन से आग्रह किया है कि इन सभी न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर त्वरित समाधान निकाला जाए, ताकि कर्मचारियों का मनोबल बना रहे और वे अपनी पूरी क्षमता के साथ उत्पादन में योगदान दे सकें।

