यथार्थ हॉस्पिटल में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से कमर दर्द का इलाज, सर्जरी के अगले दिन चलने-फिरने लगीं मरीज
नोएडा, 30 अक्टूबर 2026: छह महीने से कमर और दाईं टांग में तेज दर्द से जूझ रही 33 वर्षीय महिला को यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के बाद राहत मिली। महिला की रीढ़ के निचले हिस्से में L4-L5 स्लिप डिस्क के साथ स्पाइनल कैनाल संकरी होने के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था। इस समस्या ने उनके चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामकाज को मुश्किल बना दिया था। डॉक्टरों ने केवल 7–9 मिलीमीटर के छोटे चीरे के जरिए सर्जरी कर प्रभावित नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर किया। सर्जरी के अगले दिन ही महिला की चलने-फिरने की क्षमता में सुधार देखा गया।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के सीनियर कंसल्टेंट एवं न्यूरोसर्जन डॉ. अंकित अग्रवाल ने कहा, “इस मामले में मरीज लंबे समय से कमर और पैर के दर्द से परेशान थीं। जांच में L4-L5 स्तर पर स्लिप डिस्क के साथ स्पाइनल कैनाल के संकरे होने के कारण नसों पर दबाव पाया गया। मरीज की स्थिति और शारीरिक बनावट को ध्यान में रखते हुए हमने एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी की। केवल 7–9 मिलीमीटर के चीरे के जरिए प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर करना इस प्रक्रिया की प्रमुख विशेषता रही।”
उन्होंने आगे कहा, “स्पाइन सर्जरी को लेकर मरीजों में अक्सर बड़े चीरे और लंबे रिकवरी समय की चिंता रहती है। आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकें उपयुक्त मरीजों के लिए एक विकल्प उपलब्ध कराती हैं। हालांकि, हर मरीज के लिए एक ही तकनीक सही नहीं होती। सर्जरी का निर्णय विस्तृत जांच, बीमारी की गंभीरता और मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर लिया जाना चाहिए।”
सिर्फ 7–9 मिमी का चीरा, प्रभावित नसों पर दबाव से राहत
मरीज की चिकित्सकीय जांच में L4-L5 स्तर पर स्लिप डिस्क और स्पाइनल कैनाल के संकरे होने की पुष्टि हुई। इन स्थितियों के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था, जिससे कमर से दाईं टांग तक दर्द फैल रहा था। छह महीने तक परेशानी बने रहने और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने के बाद डॉक्टरों ने सर्जिकल उपचार का निर्णय लिया।
न्यूरोसर्जरी टीम ने एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें विशेष कैमरे और सूक्ष्म उपकरणों की सहायता से छोटे चीरे के जरिए प्रभावित हिस्से तक पहुंचा गया और नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर किया गया। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस मिनिमली इनवेसिव तकनीक में आसपास की मांसपेशियों और अन्य ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इस मामले की खास बात यह रही कि मरीज की शारीरिक बनावट के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने छोटे चीरे के जरिए प्रभावित हिस्से का उपचार किया। सर्जरी के बाद मरीज के दर्द में काफी राहत मिली और अगले ही दिन वह पहले की तुलना में अधिक आसानी से चलने लगीं।
आधुनिक स्पाइन सर्जरी में छोटे चीरे की अहमियत
एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में छोटे चीरे के जरिए कैमरे की मदद से रीढ़ के प्रभावित हिस्से को देखकर उपचार किया जाता है। इसका उद्देश्य नसों पर दबाव दूर करते हुए आसपास के स्वस्थ ऊतकों को यथासंभव सुरक्षित रखना है। उपयुक्त मरीजों में इस तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द, अस्पताल में रहने की अवधि और सामान्य गतिविधियों में लौटने के समय को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परिणाम मरीज की बीमारी, उसकी गंभीरता और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों पर निर्भर करते हैं।
समय पर जांच क्यों जरूरी है?
कमर से पैर तक फैलने वाला दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या चलने में परेशानी नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। यदि पैरों में अचानक कमजोरी बढ़े या पेशाब अथवा मल पर नियंत्रण में परेशानी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
यह मामला दर्शाता है कि स्लिप डिस्क और नसों पर दबाव की समस्या से जूझ रहे चुनिंदा मरीजों के उपचार में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। छोटे चीरे के जरिए प्रभावित हिस्से का उपचार करने वाली इस तकनीक का उद्देश्य आसपास के ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाना और मरीज की रिकवरी को बेहतर बनाना है। हालांकि, सर्जरी की उपयुक्तता मरीज की स्थिति और विस्तृत चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही तय की जाती है।

