28 अक्टूबर 2026
स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा 28 अक्टूबर 2026 को अपनी ‘तनाव से शांति की ओर’ पहल के अंतर्गत मनोविकास चैरिटेबल सोसाइटी में संस्थान के कर्मचारियों एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए भावातीत ध्यान, योग एवं प्राणायाम पर एक परिचयात्मक सत्र का आयोजन किया गया।
मनोविकास चैरिटेबल सोसाइटी एक समावेशी शैक्षणिक एवं पुनर्वास संस्थान है, जो बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगताओं से जुड़े व्यक्तियों और उनके परिवारों के सहयोग, शिक्षा एवं सशक्तीकरण के लिए कार्य करता है।
‘तनाव से शांति की ओर’ पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा तनाव प्रबंधन और समग्र कल्याण के लिए व्यावहारिक उपायों को प्रोत्साहित करना है। इसी उद्देश्य के अंतर्गत आयोजित इस सत्र में प्रतिभागियों को मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान भावातीत ध्यान की सरल एवं सहज तकनीक का परिचय दिया गया। साथ ही, योग एवं प्राणायाम के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक अभ्यासों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को महर्षि महेश योगी के जीवन, शिक्षाओं और उनके दृष्टिकोण से परिचित कराने के लिए एक वीडियो व्याख्यान भी दिखाया गया। इसके अतिरिक्त, भावातीत ध्यान के अनुभवों और उससे जुड़े लाभों को साझा करने वाले कुछ प्रासंगिक प्रशंसापत्र भी प्रदर्शित किए गए।
यह पहल महर्षि महेश योगी के उस दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसमें व्यक्ति के भीतर शांति और संतुलन विकसित करके समाज में शांति एवं सद्भाव स्थापित करने पर बल दिया गया। महर्षि का मानना था कि जब व्यक्ति आंतरिक शांति का अनुभव करता है, तो वह अपने जीवन और समाज में अधिक सकारात्मक योगदान दे सकता है। भावातीत ध्यान के माध्यम से उन्होंने व्यक्तिगत विकास और विश्व शांति के इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया।
सत्र में भावातीत ध्यान शिक्षकों विजय उप्पल एवं पूजा वशिष्ठ ने ध्यान से संबंधित जानकारी साझा की। स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से अभिलाषा नंदल एवं आलोक शर्मा उपस्थित रहे। योग सत्र का संचालन मुकुल त्यागी ने किया।
यह आयोजन ‘तनाव से शांति की ओर’ पहल के माध्यम से विभिन्न समुदायों तक मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित जागरूकता पहुँचाने तथा एक अधिक स्वस्थ, संतुलित एवं समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा।

