देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले बड़ा निर्णय लेते हुए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह नियम राज्य के प्रमुख धामों—बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम—सहित कुल 47 मंदिरों में लागू होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह निर्णय समिति की बजट बैठक में लिया गया, जिसमें चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। समिति का कहना है कि यह कदम मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, मंदिरों में केवल वही लोग प्रवेश कर सकेंगे, जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। उनका मानना है कि चारधाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल केवल पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा के केंद्र हैं।
बताया जा रहा है कि यह प्रतिबंध मंदिर परिसर और गर्भगृह दोनों पर लागू होगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान या आस्था की पुष्टि किस प्रक्रिया से की जाएगी।
इसी बैठक में चारधाम यात्रा की तैयारियों के लिए करीब 121 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी गई, ताकि श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।
इस फैसले के बाद प्रदेश में बहस तेज हो गई है। एक तरफ इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे प्रतिबंधात्मक कदम मानते हुए सवाल उठा रहे हैं।

