कुआकोंडा / जिला दंतेवाड़ा। सोमारु कड़ती जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 8 दंतेवाड़ा ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पोटाकेबिनों को नजदीकी शासकीय मिडिल स्कूल एवं हाई स्कूलों के साथ मर्ज कर छात्रावास जैसी व्यवस्था विकसित करने की मांग उठाई है।
उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण अंदरूनी गांवों के अनेक बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते थे। ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से पोटाकेबिन शुरू किए गए थे। उस समय यह व्यवस्था बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए आवश्यक थी।
लेकिन अब क्षेत्र में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने और कई क्षेत्रों के नक्सलमुक्त होने के बाद शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का समय आ गया है। परिस्थितियों में आए बदलाव को देखते हुए पोटाकेबिनों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था का मूल्यांकन कर उन्हें नजदीकी शासकीय मिडिल स्कूल एवं हाई स्कूलों के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सोमारु कड़ती ने कहा कि वर्तमान में पोटाकेबिनों को 10वीं कक्षा तक विस्तारित किया जा रहा है, लेकिन अलग से शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को ही अतिरिक्त प्रभार देकर व्यवस्था संचालित की जा रही है। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पोटाकेबिनों को सरकारी स्कूलों के साथ समन्वित कर छात्रावास या आवासीय शिक्षा व्यवस्था विकसित की जाए। इससे अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ नियमित शिक्षा मिल सकेगी, उपलब्ध शिक्षकों का बेहतर उपयोग होगा और सरकारी स्कूलों को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि DMF मद से शिक्षा के लिए खर्च होने वाली राशि का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना और शासकीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए। इसलिए पोटाकेबिनों पर होने वाले खर्च, शिक्षकों की उपलब्धता और सरकारी स्कूलों के साथ एकीकरण की संभावनाओं का तुलनात्मक आकलन किया जाना चाहिए, ताकि उपलब्ध बजट का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके।
सोमारु कड़ती ने बताया कि वे सामान्य सभा में भी कई बार इस विषय को उठा चुके हैं। उन्होंने संबंधित विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की कि बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए और बच्चों के हित में व्यावहारिक योजना बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि पोटाकेबिन शुरू करने का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना था। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिससे बच्चों को शिक्षा भी मिले, सरकारी स्कूल भी मजबूत हों और शिक्षकों एवं DMF की राशि का उचित उपयोग सुनिश्चित हो।

