दंतेवाड़ा, 29 अप्रैल 2026: नगर पालिका क्षेत्र किरंदुल के वार्ड क्रमांक 18, नड़ियां पारा के निवासी इन दिनों प्राइवेट कंपनियों की भारी वाहनों और औद्योगिक प्रदूषण के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सड़क पर जमा लाल कीचड़, नदी-नालों में मिलता दूषित पानी और टूटी-फूटी सड़कें यहां के लगभग 550 लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई हैं।
स्थानीय निवासी प्रवेश कुमार जोशी ने इस संबंध में जिला कलेक्टर दंतेवाड़ा को एक विस्तृत आवेदन सौंपकर तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
श्री जोशी के अनुसार वार्ड 18 की अनुमानित 150 की जनसंख्या सीधे तौर पर प्रभावित है। इनमें लगभग 25 स्कूली बच्चे शामिल हैं जिन्हें कीचड़ भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त किरंदुल बस्ती और आसपास के करीब 400 लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
संलग्न किए गए फोटो में देखा जा सकता है कि सड़क पर लाल रंग का कीचड़ और पानी भरा हुआ है। इसी मार्ग से प्राइवेट कंपनियों के डंपर और भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
आवेदन में बताया गया है कि कंपनियों से निकलने वाला लाल कीचड़युक्त पानी सीधे नदी और नालों में मिल रहा है। इससे भूजल दूषित हो रहा है और पीने के पानी का संकट गहरा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
कीचड़ और जर्जर सड़क के कारण आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। वहीं स्कूली बच्चों के लिए कोई परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी शिक्षा बाधित हो रही है।
श्री जोशी ने कलेक्टर से निम्न मांगें की हैं, संयुक्त जांच दल गठित कर स्थल का निरीक्षण कराया जाए और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।
प्राइवेट कंपनी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल अधिनियम और CSR नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने हेतु निर्देशित किया जाए। इनमें शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना, नदी-नालों को प्रदूषण मुक्त रखना और पर्यावरण सुरक्षा शामिल है।
कंपनी द्वारा स्वच्छ परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग एवं पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। गांव तक एम्बुलेंस पहुंचने के लिए पक्का मार्ग बनाया जाए।
क्षेत्र के स्कूली बच्चों के लिए निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार यदि कंपनी द्वारा औद्योगिक अपशिष्ट नदी-नालों में छोड़ा जा रहा है तो यह जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का उल्लंघन है। इसके तहत कंपनी पर भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कंपनी अधिनियम 2013 के तहत कंपनियों के लिए CSR के अंतर्गत लाभ का 2 प्रतिशत शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खर्च करना अनिवार्य है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि “ग्रामवासियों का जीवन, पर्यावरण और भविष्य की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है।”

