नई दिल्ली। एमसीडी के वार्ड कमेटियों के चुनाव में भाजपा, आप और इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी ( IVP ) से आए पार्षदों पर खूब मेहरबान दिखी है। भाजपा ने आप और IVP से आए पार्षदों को तीन वार्ड समितियों में चेयरमैन और तीन वार्ड समितियों में डिप्टी चेयरमैन पद का प्रत्याशी बना दिया है।
वहीं, इन्हीं दोनों पार्टियों के दो पार्षदों को स्थायी समिति के सदस्य के रूप में भी नामांकित कर दिया। इससे करीब 12 वार्ड कमेटियों के चुनाव में 27 में से आठ पार्षद वे हैं, जो आप के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर आए थे, लेकिन वे पहले और कुछ अभी भाजपा में शामिल हुए।
शामिल होने के बाद उन्हें चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन और स्थायी समिति का सदस्य तक का पद मिल गया। जबकि तीन बार और दो बार भाजपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर आए पार्षद मुंह ताकते रह गए।
इन्हें दी गई बड़ी जिम्मेदारी
जिन आप से आए पार्षदों को तीन जोन में चेयरमैन पद पर चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी भाजपा ने दी है, उसमें दक्षिणी जोन में धर्मवीर सिंह, सिटी एसपी जोन से ऊषा शर्मा और रोहिणी जोन में सुमन अनिल राणा का नाम शामिल हैं।
वहीं, आप से आए तीन पार्षदों को भाजपा ने वार्ड कमेटियों के डिप्टी चेयरमैन का प्रत्याशी बना दिया है। इसमें पश्चिमी जोन में सुनील कुमार चड्ढा आप के चुनाव चिह्न पर ही चुनाव जीतकर आए थे। इसी प्रकार नरेला जोन में दिनेश भारद्वाज भी पहले आप में थे और फिर इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी में चले गए थे।
भाजपा में शामिल होते ही प्रत्याशी
वह शुक्रवार को सुबह भाजपा में शामिल हुए और दोपहर को भाजपा ने उन्हें नरेला जोन में डिप्टी चेयरमैन पद का प्रत्याशी बना दिया। मध्य जोन में भी आप से आए प्रवीण कुमार को भाजपा ने डिप्टी चेयरमैन पद का प्रत्याशी बना दिया है।
इसी प्रकार स्थायी समिति जैसी महत्वपूर्ण समिति में सदस्य पद पर जाने वालों में मध्य जोन से हेमचंद्र गोयल का नाम है। वह आप से IVP में गए थे और भाजपा में शुक्रवार की सुबह ही शामिल हुए थे।
शामिल होने के दो घंटे बाद भाजपा ने उन्हें स्थायी समिति के सदस्य के रूप में नामांकित कर दिया। इसी प्रकार नरेला जोन में आप से आए पवन सहरावत को भी भाजपा ने स्थायी समिति में सदस्य बनाकर भेजा है।
हालांकि, सहरावत को भाजपा ने इनाम दिया है, क्योंकि सहरावत के वोट के कारण ही वर्ष 2023 में हुए स्थायी समिति के सदस्य के चुनाव में भाजपा अपने तीन सदस्य जिताने में कामयाब हुई थी।
… तो नहीं होती है सुनवाई
भाजपा के पार्षद वैसे तो आप से आए पार्षदों को निगम में जिम्मेदारी मिलने से नाराज हैं, लेकिन खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है। क्योंकि चुनाव से पहले भी भाजपा ने कई आप और कांग्रेस के नेताओं को टिकट दे दिया था और अब आप से आए पार्षदों को लगातार तवज्जो दी जा रही है।
एक भाजपा के वरिष्ठ पार्षद ने नाम न उजागर होने पर कहा कि दूसरे दलों के लोगों को भाजपा में शामिल कराने में दिक्कत नहीं है, लेकिन दिक्कत यह है कि वर्षों से भाजपा में रहकर जो लोग संघर्ष कर रहे थे, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
जबकि आप से आए पार्षद को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है तो वहां पर भाजपा के पार्षदों की सुनवाई नहीं होती। जबकि आप के ही पार्षदों की सुनवाई और काम ज्यादा होते हैं।
क्राॅस वोटिंग का भी है खतरा
एमसीडी के वार्ड कमेटियों के चुनाव में आप व IVP से आए पार्षदों को अहमियत मिलने से भाजपा पार्षदों में नाराजगी है। ऐसे में वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और स्थायी समिति सदस्य के चुनाव इन्हीं पार्षदों के वोट के द्वारा होंगे।
ऐसे में क्राॅस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। चूंकि निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होता, तो कोई भी पार्षद किसी भी दल के प्रत्याशी को वोट दे सकता है।

