दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ | 03 अप्रैल 2026
बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने एक बार फिर विकास की विसंगतियों को उजागर किया है। ग्राम पंचायत कोडेनार और पढ़ापुर के ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का दरवाजा खटखटाया है। क्षेत्र के जागरूक नागरिक प्रवेश कुमार जोशी ने PMO में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत का पंजीकरण संख्या PMOPG/E/2026/0055682 है। शिकायत में पढ़ापुर-कोडेनार मार्ग के नवनिर्माण और पंचायत के समग्र विकास की मांग की गई है।
3.5 किलोमीटर की कच्ची सड़क: ग्रामीणों के लिए रोज़मर्रा की चुनौती
शिकायत के अनुसार, पढ़ापुर नयन पारा से कोडेनार पटेल पारा तक का लगभग 3.5 किलोमीटर का मार्ग आज भी कच्ची सड़क है। जब देश “विकसित भारत” के संकल्प की ओर बढ़ रहा है, यह मार्ग बरसात के मौसम में दलदल में बदल जाता है।

इस टूटी-फूटी सड़क के कारण कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं:
- स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: मानसून के दौरान एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। इससे गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों की जान खतरे में रहती है।
- शिक्षा पर असर: स्कूल और आंगनवाड़ी जाने वाले बच्चे तथा शिक्षक रोज़ाना कीचड़ और टूटी सड़क के बीच सफर करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में उपस्थिति प्रभावित होती है।
- आर्थिक नुकसान: किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी कठिनाई होती है, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की अनदेखी
प्रवेश कुमार जोशी ने अपनी शिकायत में एक महत्वपूर्ण बात रेखांकित की है। इस क्षेत्र में 2-3 प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट मौजूद हैं जो अत्यंत सुंदर हैं। इन स्थलों में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं छिपी हैं। यदि सड़क का निर्माण होता है और इन प्राकृतिक स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाता है, तो इसके कई दूरगामी लाभ हो सकते हैं:
- ग्राम पंचायत के लिए स्थायी आय का स्रोत बन सकता है
- स्थानीय युवाओं को रोज़गार के नए अवसर मिल सकते हैं
- बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक नया गंतव्य जुड़ सकता है
- क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है
जिला कलेक्टर दंतेवाड़ा से विशेष अपील: “टेबल पर चाहिए वस्तुस्थिति रिपोर्ट”
ग्रामीणों ने समाचार माध्यमों के ज़रिए दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर से विशेष आग्रह किया है कि वे इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लें।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- तत्काल साइट निरीक्षण: कलेक्टर महोदय संबंधित विभाग (PWD/PMGSY) के अधिकारियों को तुरंत मौके पर भेजें।
- साक्ष्य-आधारित आकलन: अधिकारी फोटो और वीडियो साक्ष्य के साथ वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन करें।
- विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुति: निरीक्षण के बाद संबंधित विभाग एक वस्तुस्थिति रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करे।
- फंड आवंटन: रिपोर्ट के आधार पर सड़क निर्माण तथा स्कूल-आंगनवाड़ी के जीर्णोद्धार के लिए बजट स्वीकृत किया जाए।
आदर्श पंचायत बनाने का विज़न: समग्र विकास की रूपरेखा
शिकायतकर्ता प्रवेश कुमार जोशी ने “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के अनुरूप एक व्यापक विज़न प्रस्तुत किया है। उनकी मांग है कि कोडेनार-पढ़ापुर को आदर्श ग्राम पंचायत के रूप में विकसित किया जाए।
इस विज़न में केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि एक एकीकृत विकास ब्लूप्रिंट शामिल है:
| विकास का क्षेत्र | प्रस्तावित कार्य |
|---|---|
| सड़क अवसंरचना | पढ़ापुर-कोडेनार मार्ग का पक्कीकरण |
| शिक्षा | स्कूल और आंगनवाड़ी भवनों का जीर्णोद्धार |
| स्वास्थ्य | प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता |
| पर्यटन | प्राकृतिक स्थलों का व्यवस्थित विकास |
| रोज़गार | स्थानीय युवाओं के लिए अवसर सृजन |
आगे क्या? प्रशासन की जवाबदेही पर सबकी नज़र
अब देखना यह है कि PMO में शिकायत पहुंचने और स्थानीय स्तर पर मांग उठने के बाद प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है। ग्रामीणों की उम्मीद है कि उनकी इस “कच्ची राह” को जल्द ही विकास की “पक्की डगर” में बदला जाएगा।
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार से अपेक्षा है कि वे इस मामले में शीघ्र संज्ञान लें। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विकास की हर पहल न केवल सुविधाएं देती है, बल्कि लोगों का विश्वास भी मज़बूत करती है।
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