2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की बीच बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर शंट दिया। पिछले साल मई में ही मायावती ने आकाश आनंद को चीफ नेशनल कोर्डिनेटर पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। आकाश आनंद को तीसरी बार पद से हटाए हुए मायावती ने कहा कि वह अभी राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हुए हैं। फिलहाल वह पार्टी में रहकर काम कर सकते हैं। लेकिन आकाश आनंद को कोई भी बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती के इस फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपना एक्स प्रोफाइल बदल लिया और राष्ट्रीय संयोजक की जगह खुद को बसपा कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बताई।
बतादें कि आकाश आनंद को सबसे पहले मायावती ने 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटाया था। हालांकि एक महीने बाद जून में वापस उनकी जिम्मेदारियों को बहाल कर दिया गया था। मार्च 2025 में एक विवाद के दौरान आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। माफी मांगने के बाद आकाश आनंद ने एक महीने में बसपा में फिर से वापस की थी।
देशभर में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा
बसपा की अखिल भारतीय स्तर की हुई बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने अकेले ही सभी चुनाव लड़ने का फैसला किया। मायावती ने कहा, दूसरी पार्टियों के उलट, कांग्रेस हर मामले में दलित-विरोधी और अंबेडकर-विरोधी पार्टी रही है, जिसका इतिहास सभी जानते हैं। ऐसे में, बसपा ने अब देश भर में सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ने का फ़ैसला किया है। मायावती ने यह भी साफ़ किया कि बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद पार्टी में काम करते रहेंगे, लेकिन फ़िलहाल उन्हें कोई बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं दी जाएगी। बसपा के संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में मदद करने की तो इजाज़त दी थी, लेकिन पार्टी के सत्ता में आने के बाद उन्हें चुनाव का टिकट या पद देने के वे ख़िलाफ़ थे। मैं भी उस संकल्प के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूँ।
पूरी ईमानदारी से पार्टी के लिए काम करें कार्यकर्ता
मायावती ने कहा कि चुनावों के दौरान राजनीतिक विरोधियों द्वारा अपनाई जाने वाली कथित चालों से पार्टी को बचाने के लिए भी यह ज़रूरी था। बैठक में, मायावती ने पार्टी के कामकाज की समीक्षा की, कमियों पर चर्चा की और संगठन की सालाना गतिविधियों के लिए अलग-अलग स्तर के पदाधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने इन निर्देशों को पूरी ईमानदारी और लगन से लागू करने को कहा। मायावती ने दोहराया कि ‘बहुजन समाज’ के हितों की रक्षा करना और शोषित व वंचित वर्गों को सत्ता में लाना बसपा का मुख्य मिशन है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस मक़सद को हासिल करने के लिए राजनीतिक सत्ता पाना ज़रूरी है।
मोहन भागवत के बयानों पर बरसीं मायावती
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों पर मायावती ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान है क्योंकि उसकी कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है। भागवत ने अमेरिका की अपनी हालिया यात्रा के दौरान कहा था कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हिंदू दर्शन यह मानता है कि अलग-अलग धर्म एक ही सच्चाई तक ले जा सकते हैं, और विविधता में एकता पर बल दिया।
आरएसएस की कथनी और करनी में अंतर
मायावती ने कहा, ‘बहुजन समाज’ के करोड़ों लोगों के वास्तविक हितों और कल्याण, आरक्षण के उनके संवैधानिक अधिकार, और महिलाओं, मुसलमानों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में आरएसएस की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है। यही कारण है कि इसकी विश्वसनीयता कम है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अस्तित्व में होने के बावजूद, आरएसएस वह पहचान और सम्मान हासिल नहीं कर पाया है जिसकी वह चाहत रखता है। मायावती ने कहा, अगर आरएसएस को बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए मानवीय, कल्याणकारी और समतावादी संविधान में पूरा भरोसा और प्रतिबद्धता है, तो उन्हें ईमानदारी से इसका पालन करना चाहिए और अपने लोगों से भी इसका पालन करवाना चाहिए।

