नोएडा। विद्यार्थियों में उद्यमशीलता, नवाचार एवं व्यावसायिक सोच को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आईएमएस नोएडा में विशेष सत्र का आयोजन किया गया। बीबीए एवं एमबीए के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस सत्र में युक्ति कंसल्टिंग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीना शर्मा ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नए व्यवसाय की शुरुआत, नवाचार तथा उद्यमशील मानसिकता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया।

आईएमएस नोएडा के वाइस प्रेसिडेंट चिराग गुप्ता ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें नवाचार, रचनात्मक सोच और उद्यमशीलता की समझ विकसित करना भी जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने, चुनौतियों का सामना करने और भविष्य में रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि आईएमएस नोएडा विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव और उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन भी प्रदान करता रहे।
कार्यक्रम के दौरान बीना शर्मा ने विद्यार्थियों को उद्यमिता की बारीकियों से अवगत कराते हुए एक सफल स्टार्टअप की स्थापना से लेकर उसके सतत विकास तक की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने नए व्यावसायिक विचारों को प्रभावी कार्ययोजना में बदलने, बाजार की आवश्यकताओं को समझने, उपलब्ध अवसरों की पहचान करने तथा व्यावसायिक चुनौतियों का रणनीतिक दृष्टिकोण से समाधान करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सफल उद्यमी बनने के लिए नवाचारपूर्ण सोच, दूरदर्शिता, आत्मविश्वास और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को जोखिमों का आकलन करते हुए सोच-समझकर निर्णय लेने, असफलताओं से सीखने और निरंतर नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक सशक्त उद्यमशील मानसिकता न केवल नए व्यावसायिक अवसरों का सृजन करती है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और रोजगार सृजन के माध्यम से समाज एवं अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देने के लिए भी सक्षम बनाती है।
वहीं संस्थान की डीन डॉ. वर्तिका चतुर्वेदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, निर्णय लेने की क्षमता और समस्याओं के समाधान की समझ विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवादात्मक सत्र विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, नए अवसरों का लाभ उठाने और अपने व्यावसायिक विचारों को सफल उद्यम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

