शिमला। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित संसाधन विकास की राह में बाधा जरूर हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश ने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और बेहतर क्रियान्वयन से पहाड़ भी विकास की रफ्तार पकड़ सकता है। केंद्र सरकार की वीबी-जी राम जी योजना के 12 सितंबर तक के आंकड़ों में हिमाचल ने उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों के बीच सक्रिय श्रमिकों की भागीदारी और मजदूरी व्यय की हिस्सेदारी में मजबूत बढ़त बनाई है।
खास बात यह है कि यह प्रदर्शन प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव, गठन और नए प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया के बीच सामने आया है।
12.87 लाख सक्रिय श्रमिकों की भागीदारी
जुलाई, 2026 से शुरू हुई योजना में हिमाचल में 12.87 लाख सक्रिय श्रमिकों ने 19.23 लाख मानव दिवस अर्जित किए। प्रदेश ने योजना पर 68.93 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 54.05 करोड़ रुपये यानी 79.57 प्रतिशत सीधे मजदूरी के रूप में श्रमिकों को मिले। इस दौरान 1415 कार्य पूरे किए गए।
कम खर्च के बावजूद मजदूरी मद में बेहतर
मानव दिवस और कुल व्यय में हालांकि मिजोरम हिमाचल से आगे रहा। मिजोरम में 2.20 लाख सक्रिय श्रमिकों ने 23.06 लाख मानव दिवस अर्जित किए और 83.08 करोड़ रुपये खर्च हुए। लेकिन, उसके कुल व्यय में मजदूरी की हिस्सेदारी 69.84 प्रतिशत रही। यानी हिमाचल ने कम कुल खर्च के बावजूद मजदूरी मद में अपेक्षाकृत बेहतर हिस्सा सुनिश्चित किया।
पंचायती चुनाव और प्रशिक्षण के बीच बेहतर क्रियान्वयन
वीबी- जी राम जी योजना में हिमाचल ने पहाड़ी राज्यों को पीछे छोड़ा है, जबकि प्रदेश में चुनावी प्रकिया और पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। बावजूद इसके बेहतर कार्य हुआ है।
-सी पाल रासु, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग।

