देहरादून: ऋषिकेश में बीकेटीसी (बदरी-केदार मंदिर समिति) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.
बीकेटीसी की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक शनिवार को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप कार्यालय सभागार में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई. भगवान बदरीविशाल और भगवान केदारनाथ जी की स्तुति के साथ शुरू हुई इस बैठक में सबसे पहले विशेष आमंत्रित सदस्यों का स्वागत किया गया. इसके बाद पिछली बैठक की कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा की गई और फिर मुख्य एजेंडे पर विस्तार से चर्चा शुरू हुई.
बैठक का मुख्य फोकस प्रथम चरण की यात्रा की सफलता की समीक्षा करने और आगामी द्वितीय चरण की यात्रा व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त बनाने पर रहा. बैठक को संबोधित करते हुए बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के कुशल दिशा-निर्देशों में इस वर्ष की चारधाम यात्रा ऐतिहासिक रही है.
उन्होंने प्रथम चरण की यात्रा को निर्विघ्न और सुगम तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया. अध्यक्ष ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष अभी तक 50 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने श्री हेमकुंड साहिब सहित चारधाम के दर्शन किए हैं, जबकि 60 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं. केवल श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम की बात करें तो रिकॉर्ड 32 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जिनमें बदरीनाथ धाम में 17,22,908 और केदारनाथ धाम में 14,92,047 तीर्थयात्री पहुंचे हैं.
76 करोड़ रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई: इस यात्रा सीजन में दोनों धामों से समिति को 76 करोड़ रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई है. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 20 फीसदी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं, जबकि कपाट बंद होने में अभी दो महीने का समय शेष है.
बैठक के एजेंडे को चर्चा के लिए रखा: मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ द्वारा बैठक के एजेंडे को चर्चा के लिए रखा गया. बैठक में यात्रियों की सुविधा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए. मुख्य रूप से द्वितीय चरण की यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने, वेबसाइट का आधुनिकीकरण करने, यात्रा एसओपी लागू करने, धामों व अधीनस्थ मंदिरों में सीसीटीवी कैमरों की पुख्ता व्यवस्था करने और चढ़ावे की गणना को पूर्ण पारदर्शी बनाने पर सहमति बनी.
संस्कृत महाविद्यालय नाम बदला जाएगा: इसके अलावा गुप्तकाशी शोणितपुर स्थित संस्कृत महाविद्यालय का नाम समिति के दिवंगत सदस्य श्रीनिवास पोस्ती के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया. बुनियादी ढांचे के विकास के तहत श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ के जीर्णोद्धार का द्वितीय चरण शुरू करने, श्री तुंगनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और श्री त्रिजुगीनारायण मंदिर को प्रसिद्ध ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए.
कर्मचारियों के पक्ष में भी लिए गए फैसले: समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने जानकारी दी कि कर्मचारियों और स्थानीय हकहकूकधारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भी कई बड़े निर्णय लिए गए हैं. बैठक में अस्थायी कर्मचारियों के स्थायीकरण, ‘समान कार्य समान वेतन’ नीति, स्थायी कर्मचारियों की पदोन्नति व असमय दिवंगत अस्थायी कर्मियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने पर विस्तृत चर्चा हुई.
बिना स्थायी हुए सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को अधिवर्षता आयु पूरी होने पर एकमुश्त राशि देने और कर्मचारी सेवानियमावली में आवश्यक सुधार करने के प्रस्ताव पारित किए गए. साथ ही भीड़ प्रबंधन के लिए विषय विशेषज्ञों की सहायता लेने, सीता माता मंदिर चांई के जीर्णोद्धार, वेद संस्कृत महाविद्यालय खुलवाने, और हकहकूकधारियों व दस्तूरधारियों के आवेदनों पर सकारात्मक विचार कर प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.
