jansamwad tvjansamwad tvjansamwad tv
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • महाराष्ट्र
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • गुजरात
    • पश्चिम बंगाल
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
Reading: हिमाचल में नए जिलों की सुगबुगाहट से गरमाई सियासत, सुक्खू सरकार के आयोग गठन के बाद चर्चाएं तेज
Share
Font ResizerAa
jansamwad tvjansamwad tv
Font ResizerAa
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
  • Home
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • महाराष्ट्र
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • गुजरात
    • पश्चिम बंगाल
  • शिक्षा
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • टेक
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » हिमाचल में नए जिलों की सुगबुगाहट से गरमाई सियासत, सुक्खू सरकार के आयोग गठन के बाद चर्चाएं तेज
राज्यहिमाचल प्रदेश

हिमाचल में नए जिलों की सुगबुगाहट से गरमाई सियासत, सुक्खू सरकार के आयोग गठन के बाद चर्चाएं तेज

TRIPTY SRIVASTAVA
Last updated: October 15, 2026 10:44 am
TRIPTY SRIVASTAVA
Share
SHARE

शिमला। हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की कवायद के साथ सियासत भी गरमा गई है। विधानसभा चुनाव में करीब 13 महीने का समय शेष है। राज्य की सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित किया है। अब चर्चा इस बात पर है कि क्या प्रदेश को नए जिले मिलेंगे और यदि ऐसा हुआ तो किन क्षेत्रों की प्रशासनिक सीमाएं बदलेंगी।

Contents
About The AuthorTRIPTY SRIVASTAVA

सबसे बड़े जिले कांगड़ा और मंडी के संभावित पुनर्गठन से लेकर रामपुर, पालमपुर, नूरपुर, देहरा और सुंदरनगर को जिला बनाने की मांग तक, कई विकल्प राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय हैं। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इसको लेकर चर्चा हो चुकी है।

कांगड़ा बंटेगा या मंडी

हिमाचल में जिला गठन की मांग का इतिहास पुराना है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में नए जिले बनाने की संभावनाएं तलाशी गईं, लेकिन 1972 के बाद प्रदेश में कोई नया राजस्व जिला नहीं बना। सरकार ने आयोग बनाकर जिलों से लेकर उपमंडल, तहसील, उपतहसील और विकास खंडों तक की समीक्षा का रास्ता खोला है। सरकार व संगठन में चर्चा ये है कि कांगड़ा बंटेगा या मंडी।

राजनीतिक चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि हिमाचल में क्षेत्रीय संतुलन का चुनावी राजनीति से गहरा संबंध रहा है। कांगड़ा में 15 विधानसभा क्षेत्र हैं, जबकि मंडी में 10 और शिमला जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। इन जिलों का प्रशासनिक आकार, भूगौलिक परिस्थितियां और राजनीतिक प्रतिनिधित्व अलग-अलग हैं। ऐसे में किसी भी बदलाव का असर स्थानीय प्रशासन के साथ क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

हर सरकार में उठता रहा है जिला गठन का मुद्दा

नए जिले बनाने की मांग को लेकर हिमाचल की राजनीति में पहले भी कई बार हलचल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में सुंदरनगर को जिला बनाने की मांग उठी थी। उस समय वहां अतिरिक्त उपायुक्त की तैनाती की गई थी।

बाद की सरकारों में भी नए जिलों की मांग उठती रही, लेकिन पूर्ण प्रशासनिक जिले बनाने पर सहमति नहीं बन सकी। अब आयोग के गठन के समय मिशन-2027 की तैयारियों में जुटी सुक्खू सरकार के फैसले को राजनीतिक नजरिये से भी देखा जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने आयोग बनाने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समीक्षा के मानक जनता की सुविधा और प्रशासनिक जरूरतों पर केंद्रित रहते हैं या क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांगें भी निर्णय को प्रभावित करती हैं।

सुक्खू के संगठनात्मक प्रयोग से भी जुड़ा है मामला

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब पार्टी में संगठनात्मक जिलों और ब्लाकों की संख्या बढ़ाने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने संगठनात्मक जिलों के गठन का विरोध किया था। उनका मानना था कि संगठनात्मक स्तर पर अलग जिले बनाने से भविष्य में प्रशासनिक जिला बनाने की मांग को बल मिल सकता है।

वर्तमान में कांग्रेस में शिमला शहरी और शिमला ग्रामीण के लिए अलग-अलग जिला अध्यक्ष हैं। भाजपा ने भी अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए पांच अतिरिक्त संगठनात्मक जिले बनाए हैं।

इस तरह दोनों प्रमुख दलों के संगठनात्मक ढांचे में बड़े भौगोलिक क्षेत्रों को अलग-अलग इकाइयों में बांटने का प्रयोग हो चुका है। नए जिले बनाने के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क जनता की सुविधा का है। दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को उपायुक्त कार्यालय और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

मई महीने में कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

मई महीने में आयोजित कैबिनेट में इसकी चर्चा हुई थी। सरकार ने इसकी मंजूरी दी थी। अब सरकार ने इसके लिए आयोग गठित किया है।

highlights

Toggle
  • About The Author
    • TRIPTY SRIVASTAVA

About The Author

Avatar

TRIPTY SRIVASTAVA

See author's posts

    Subscribe to Our Newsletter
    Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
    [mc4wp_form]
    Share This Article
    Email Copy Link Print
    Previous Article हिमाचल में प्रशासनिक ढांचे का होगा पुनर्गठन: नए जिलों और तहसीलों की समीक्षा के लिए गठित आयोग 6 महीने में देगा रिपोर्ट
    Next Article शिमला: हिमाचल में नए जिलों और प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए आयोग गठित, 6 महीने में देनी होगी रिपोर्ट
    Leave a Comment

    Leave a Reply Cancel reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Might Also Like

    थाना जारचा पुलिस द्वारा
    राज्य

    थाना जारचा पुलिस द्वारा अवैध शस्त्र के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से 01 अवैध तमंचा .315 बोर मय 01 जिन्दा कारतूस .315 बोर बरामद।

    कार्यवाही का विवरणः थाना जारचा पुलिस द्वारा दिनांक 22.03.2026 को समाना नहर के पास से अभियुक्त रविन्द्र उर्फ रवि पुत्र…

    1 Min Read
    उत्तराखंडराज्य

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद ऊधम सिंह की आदमकद प्रतिमा का किया अनावरण, पार्किंग एवं आधारभूत विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    रूद्रपुर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने जनपद भ्रमण के दौरान रुद्रपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम…

    3 Min Read
    उत्तराखंडराज्य

    महिलाओं के लिए CM धामी के बड़े ऐलान, मुफ्त रोडवेज सफर, पिंक ई-बस और हाईटेक टॉयलेट की सुविधा

    देहरादून: उत्तराखंड में आगामी साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. उससे पहले ही धामी सरकार, युवाओं और महिलाओं के…

    3 Min Read
    राज्यहरियाणा

    हरियाणा कैडर के IPS आलोक मित्तल बने BPR&D के नए महानिदेशक, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

    चंडीगढ़: गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) का नया महानिदेशक (DG) हरियाणा कैडर के 1993…

    2 Min Read
    jansamwad tv

    यदि आपको “https://jansamwadtv.com/” पर छपी किसी सामग्री या वीडियो कंटेंट में सम्पादकीय आचार संहिता की चूक को लेकर कोई शिकायत है तो आप Contact@jansamwadtv.com E-mail कर अपनी शिकायत हमारे Grievance Officer को भेज सकते हैं।

    विज्ञापन के लिए संपर्क करें:

    contact@jansamwadtv.com

    • Privacy Policy
    • About us
    • Disclamer
    • Contact Us
    Reading: हिमाचल में नए जिलों की सुगबुगाहट से गरमाई सियासत, सुक्खू सरकार के आयोग गठन के बाद चर्चाएं तेज
    Share

    © Jansamwadtv. All Rights Reserved.

    Welcome Back!

    Sign in to your account

    Username or Email Address
    Password

    Lost your password?

    Forget Password