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जेन-जी से टकराव नहीं, संवाद: नायब सैनी का मंत्र—पहले सुनो, फिर समझाओ

TRIPTY SRIVASTAVA
Last updated: August 8, 2026 11:43 am
TRIPTY SRIVASTAVA
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चंडीगढ़:  नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए घटनाक्रम के बाद हरियाणा की राजनीति में नई पीढ़ी के साथ संवाद का मुद्दा भाजपा संगठन की रणनीति के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जेन-जी यानी नई युवा पीढ़ी के साथ किसी तरह के टकराव या तीखी बहस के बजाय संवाद और विश्वास का रास्ता अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि युवाओं को जवाब देने से पहले उनकी बात समझना जरूरी है और इसके लिए धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुननी होंगी।

Contents
About The AuthorTRIPTY SRIVASTAVA

नायब सैनी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब जेन-जी की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में नई पीढ़ी किसी भी मुद्दे पर तेजी से प्रतिक्रिया देती है और अपनी बात व्यापक स्तर तक पहुंचाने की क्षमता रखती है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने संगठन को संकेत दिया है कि युवाओं को केवल राजनीतिक समर्थक या मतदाता के तौर पर देखने के बजाय उन्हें संवाद के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में जोड़ा जाए।

नायब सैनी का नया मंत्र—पहले सुनो, फिर समझाओ

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संगठन के सामने संवाद की एक स्पष्ट कार्यशैली रखी है। उनका सुझाव है कि युवाओं के साथ बातचीत में 80 प्रतिशत समय उनकी बात सुनने और केवल 20 प्रतिशत समय अपनी बात रखने की नीति अपनाई जाए।
मुख्यमंत्री का मानना है कि राजनीतिक कार्यकर्ता यदि शुरुआत से ही अपनी बात साबित करने या युवा की राय को गलत ठहराने में लग जाएंगे तो वास्तविक संवाद स्थापित नहीं हो पाएगा। इसके विपरीत यदि युवा को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर दिया जाए तो उसकी सोच, असंतोष, अपेक्षाओं और प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
नायब सैनी का यह फार्मूला संगठन के लिए केवल संवाद का तरीका नहीं, बल्कि युवाओं की वास्तविक नब्ज समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

युवाओं के घर तक पहुंचने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को युवाओं के घरों तक पहुंचने पर जोर दिया है। हालांकि, इस संपर्क का उद्देश्य केवल राजनीतिक प्रचार नहीं होगा। नायब सैनी चाहते हैं कि कार्यकर्ता घरों में जाकर युवाओं से सहज माहौल में बातचीत करें और उनकी समस्याओं तथा विचारों को समझें।
युवाओं से रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीक, खेल, सामाजिक बदलाव और भविष्य को लेकर उनकी अपेक्षाओं पर बातचीत की जा सकती है। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि पार्टी कार्यकर्ता पहले यह जानें कि युवा क्या सोच रहा है और उसके बाद ही सरकार या भाजपा की नीतियों के बारे में अपनी बात रखें। यह रणनीति भाजपा के पारंपरिक जनसंपर्क अभियान से अलग मानी जा रही है, क्योंकि इसमें एकतरफा प्रचार की बजाय दोतरफा संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है।

जंतर-मंतर के बाद क्यों बदला फोकस?

जंतर-मंतर के घटनाक्रम ने नई पीढ़ी के राजनीतिक व्यवहार और उसकी संवेदनशीलता को लेकर भाजपा संगठन के भीतर चर्चा को तेज किया है। नई पीढ़ी किसी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया खुलकर देने के साथ-साथ उसे सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित करती है।

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इसी बदलते माहौल को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह दी है। उनका संदेश है कि संवेदनशील मुद्दों पर युवाओं के साथ तीखी बहस करने या तत्काल प्रतिवाद करने से बचा जाए। यदि किसी युवा की राय भाजपा की सोच से अलग है तो पहले उसकी बात सुनी जाए। इसके बाद तथ्यों और तर्क के आधार पर सकारात्मक बातचीत की जाए। इस तरह असहमति को टकराव में बदलने के बजाय लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा बनाया जा सकता है।

नई प्रदेश टीम को नायब सैनी ने बनाया ताकत

मुख्यमंत्री ने भाजपा की नई प्रदेश टीम की युवा संरचना को भी इस अभियान की बड़ी ताकत माना है। पार्टी के अधिकांश प्रदेश पदाधिकारी 55 वर्ष से कम आयु के हैं। नायब सैनी का मानना है कि अपेक्षाकृत युवा टीम नई पीढ़ी की भाषा, सोच और संवाद के तौर-तरीकों को अधिक सहजता से समझ सकती है।

युवा पदाधिकारियों के जरिए जेन-जी तक पहुंच बनाना संगठन के लिए आसान हो सकता है। इसके साथ ही वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव और युवा पदाधिकारियों की ऊर्जा का संयोजन भी पार्टी को व्यापक संवाद की क्षमता दे सकता है।

शिक्षाविदों से लेकर चिकित्सकों तक को जिम्मेदारी

नायब सैनी ने युवा संवाद को केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित रखने के बजाय समाज के अलग-अलग प्रभावशाली वर्गों को भी इसमें जोड़ने पर जोर दिया है। शिक्षाविद, चिकित्सक, वकील, व्यापारी और अन्य बुद्धिजीवी वर्ग से जुड़े भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे अपने सामाजिक संपर्कों के माध्यम से युवाओं के बीच सकारात्मक संवाद बढ़ाएं।
इसका उद्देश्य यह है कि युवा संवाद केवल पार्टी कार्यालयों और राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोग अपने पेशेवर और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचें तथा उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को संगठन तक पहुंचाएं।

नायब सैनी की रणनीति में सोशल मीडिया से आगे जमीन पर संवाद

जेन-जी के लिए सोशल मीडिया जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने की नहीं, बल्कि युवाओं से वास्तविक जीवन में भी संवाद स्थापित करने की है। मुख्यमंत्री की रणनीति इसी दिशा में दिखाई देती है। पार्टी कार्यकर्ताओं को डिजिटल संदेशों के साथ-साथ युवाओं के बीच व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
नायब सैनी का मानना है कि सोशल मीडिया पर बहस के बजाय आमने-सामने का संवाद अधिक प्रभावी हो सकता है। इससे युवा अपनी बात खुलकर रख सकता है और कार्यकर्ता भी उसकी सोच को बिना किसी पूर्वाग्रह के समझ सकता है।

जेन-जी को साधना नहीं, समझना चाहते हैं नायब सैनी

मुख्यमंत्री की रणनीति का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि नई पीढ़ी को केवल चुनावी गणित के नजरिये से नहीं देखा जाए। जेन-जी आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण पीढ़ियों में होगी। इस पीढ़ी की प्राथमिकताएं भी पारंपरिक राजनीति से अलग हो सकती हैं। रोजगार के साथ करियर की स्वतंत्रता, तकनीक, उद्यमिता, शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक सम्मान, पारदर्शिता और बेहतर जीवन अवसर उसके लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
ऐसे में नायब सैनी का जोर युवाओं को अपनी बात मनाने से ज्यादा उनकी बात समझने पर है। राजनीतिक रूप से देखें तो यह रणनीति भाजपा और युवा वर्ग के बीच दीर्घकालीन संबंध बनाने की कोशिश भी है।

बूथ स्तर तक जाएगा नायब सैनी का युवा संवाद मॉडल

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भाजपा संगठन इस रणनीति को बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। पार्टी का प्रयास रहेगा कि हर स्तर पर कार्यकर्ता युवाओं से संपर्क स्थापित करें और संवाद को नियमित प्रक्रिया बनाएं। यानी यह केवल किसी आंदोलन या राजनीतिक घटनाक्रम के बाद की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर युवा संवाद को स्थायी रूप देने की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है।

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