दंतेवाड़ा/किरंदुल | 8 अप्रैल 2026
किरंदुल नगरपालिका की अस्थाई दखल शुल्क (टोल) निविदा 2026-27 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। लगातार भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के चलते अब स्थानीय स्तर पर डिजिटल e-Toll सिस्टम लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है।
🔍 क्या है पूरा मामला?
पिछले कई वर्षों से किरंदुल में टोल वसूली प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। जानकारी के अनुसार:
- निविदा प्रक्रिया बार-बार निरस्त या स्थगित होती रही है
- अवैध वसूली और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं
- अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं
हालांकि इस वर्ष बोली 14.20 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन पुरानी वसूली प्रणाली जारी रहने पर भ्रष्टाचार खत्म होने की संभावना कम मानी जा रही है।
🚛 छोटे कस्बे में भी बड़ी समस्या
किरंदुल जैसे छोटे नगर में भारी वाहनों से वसूला जाने वाला टोल पूरी तरह अपारदर्शी बताया जा रहा है। इससे:
- नगरपालिका की छवि खराब हो रही है
- ट्रक चालकों को परेशानी हो रही है
- राजस्व का सही आंकलन नहीं हो पा रहा
💡 समाधान: डिजिटल e-Toll सिस्टम
स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों ने Digital India मिशन के तहत आधुनिक e-Toll सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें निम्न उपाय शामिल हैं:
✔️ प्रस्तावित डिजिटल समाधान
- डिजिटल पर्ची मशीन (e-Ticketing System)
हर ट्रांजेक्शन का रियल-टाइम रिकॉर्ड और प्रिंट रसीद - QR Code आधारित भुगतान (UPI Payment System)
ड्राइवर सीधे स्कैन कर भुगतान कर सकेंगे - POS मशीन और कार्ड भुगतान सुविधा
डेबिट/क्रेडिट कार्ड से आसान भुगतान - कैश पर भी डिजिटल रसीद अनिवार्य
हर भुगतान का ट्रांजेक्शन ID और समय रिकॉर्ड - मोबाइल ऐप आधारित ऑनलाइन सिस्टम
पहले से शुल्क जमा कर e-Receipt प्राप्त करने की सुविधा - केंद्रीय मॉनिटरिंग डैशबोर्ड
- कलेक्टर, अधिकारी और राज्य स्तर पर निगरानी
- रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग
- मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक
📊 क्या होंगे फायदे?
अगर यह e-Toll सिस्टम लागू होता है, तो कई बड़े बदलाव संभव हैं:
- ✔️ भ्रष्टाचार पर रोक
- ✔️ वसूली में पारदर्शिता
- ✔️ नगरपालिका की आय में वृद्धि
- ✔️ ट्रक चालकों को राहत
- ✔️ अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित
🏛️ राज्य सरकार से मांग
स्थानीय लोगों ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि:
- किरंदुल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में e-Toll सिस्टम लागू किया जाए
- सभी नगरपालिकाओं के लिए “यूनिफॉर्म डिजिटल दखल शुल्क नीति” बनाई जाए
- अन्य सेवाओं जैसे:
- संपत्ति कर
- जल कर
- निर्माण अनुमति
को भी चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जाए
🗣️ स्थानीय प्रतिक्रिया
नागरिकों का मानना है कि अगर सरकार समय रहते कदम उठाती है, तो:
“किरंदुल पूरे छत्तीसगढ़ में ई-गवर्नेंस का मॉडल बन सकता है।”
✍️ रिपोर्ट: भूपेश्वर साहू

